हाल ही में चर्चाओं में रही हिंदी फिल्म कागज की तरह तहसील इगलास के गांव भौरा गोरवा के जीवित बुजुर्ग के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित भूरे खां के नाम से जारी हुए इस प्रमाण पत्र को उनकी जमीन के दस्तावेजों में भी दाखिल कर दिया गया है। हालांकि, यह गड़बड़ी क्वार्सी के नगला पटवारी इलाके की एक महिला के पति के मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन पर हुई है। मगर अब पीड़ित बुजुर्ग खुद को जीवित साबित करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। बृहस्पतिवार को डीएम और एसएसपी के दफ्तर भी पहुंचा।
भूरे खां ने बताया कि वह भौरा गोरवा गांव का रहने वाला है। वह गरीबी रेखा से नीचे आता है। कई साल पहले उसे सरकार ने ढाई बीघा जमीन जीवन यापन के लिए दी थी। वाकया यह है कि मुन्नी बेगम पत्नी भूरे खां निवासी नगला पटवारी, गली-7, क्वार्सी के आवेदन पर 21 दिसंबर 2018 को उस भूरे खां को मृत बताते हुए 23 फरवरी 2019 को फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करा दिया गया, जबकि उनकी पत्नी हमीदा बेगम है। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की बात लेखपाल द्वारा बताई गई। तहसील में संपर्क किया तो पता लगा कि ढाई बीघा जमीन के दस्तावेजों में भी यह मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल करा दिया गया है।
पिछले दो साल से वह चक्कर काट रहे हैं, जिस महिला ने यह प्रमाण पत्र जारी कराया है। आवेदन के समय उसने अपना मोबाइल नंबर भी दर्जा कराया है। मगर, उक्त नंबर पर फोन करने पर कोई पुरुष फोन उठाता है और किसी मुन्नी बेगम को न जानने की बात कहता है। हालांकि जमीन अभी भूरे खां के नाम दर्ज है। मगर मृत्यु प्रमाण पत्र के कारण वह उसमें अपने वारिसान नहीं दर्ज करा पा रहा है। हालांकि मृत्यु प्रमाण पत्र में उसका पता नगला पटवारी लिख दिया गया है, जबकि वह मूल रूप से भौरा गोरवा का है। इस मामले में दोपहर में वह डीएम व एसएसपी से मिलने पहुंचा। मगर देरी के कारण उसकी मुलाकात नहीं हो सकी। अभी सवाल यह भी है कि यह ऑनलाइन आवेदन के समय गलती से हुआ है या किसी ने साजिश के तहत किया है। यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।