बेगमबाग का गड्ढा इन दिनों प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की जिले की सबसे बड़ी थोक मंडी बन गया है। यहां पर चरस, गांजा, स्मैक और दूसरे नशीले पदार्थ बेखौफ बेचे जा रहे हैं। कोई रोक-टोक नहीं है। रोजाना पांच से आठ लाख रुपये तक के नशीले पदार्थ यहां से सप्लाई हो रहे हैं। बाकी जिले में भी यहां से जुडे़ हुए लगभग 100 एजेंट घूम-घूमकर ये काम कर रहे हैं।
50 एजेंट इस समय कर रहे नशे का कारोबार
शहर में इस वक्त लगभग 50 के करीब एजेंट घूम रहे हैं। जो मीनाक्षी पुल, रेलवे ट्रैक का शहरी इलाका, कठपुला के नीचे, रसलगंज, श्याम नगर, घंटाघर और अंबेडकर पार्क, किशनपुर तिराहा, सासनीगेट चौराहा, नौरंगाबाद-छावनी, धौर्रामाफी की पुलिया, जीवनगढ़, जमालपुर में नशे की सप्लाई करते हैं। पूरेे जिले में इन एजेंटों की संख्या 100 तक बताई जा रही है। अधिकांश एजेंट पांच से आठ हजार रुपये तक का माल रोज बेच देते हैं। कुछ बड़े एजेंट 10 हजार रुपये तक की सप्लाई कर लेते हैं। इनमें से अधिकांश एजेंट खुद नशे का शिकार भी हैं। ये एजेंट चरस, गांजा और स्मैक की पुड़िया बनाकर अपने कपड़ों में इस तरह से फिट कर लेते हैं। वह देखने में मोटे लगते हैं, लेकिन हकीकत में ये मोटाई उस माल की होती है, जिसको वह लेकर चलते हैं। ग्राहक इन एजेंटाें को पहचानते हैं और सीधे माल लेने की बात होती है।
पैसा दो और माल लो।
दो साल पहले पुलिस ने तोड़ी थी नशे की कमर
दो साल पहले इस कारोबार की कमर तोड़ने का पुलिस ने अभियान चलाया था। जिसमें दो मुख्य सरगना पकड़े गए थे, जिनके पास से 10-10 किलो चरस, गांजा और स्मैक बरामद हुआ था। आलम ये हुआ कि बेगमबाग में फड़ लगाकर माल बेचा जाने लगा था। पूर्व में दो निवर्तमान इंस्पेक्टरों ने इन पर सख्ती से डंडा चलवाया। डंडा चला तो पता ये चला कि इसमें कुछ सिपाहियों की मिलीभगत है। इन सिपाहियों को वहां से हटाकर अलग अलग स्थानों को भेजा गया। एजेंटों को संगीन धाराओं में जेल भेजा गया। इसमें दो गुटों में गोलियां चलने की नौबत आ गई। उसके बाद कुछ दिन मामला ठंडा पड़ गया और कारोबार बंद हो गया।
क्वार्सी पुलिस को अल्टीमेटम
इस विषय में एसएसपी राजेश पांडेय से जब चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि शहर ही नहीं जिले भर में नशे के कारोबार को किसी भी सूरत में चलने नहीं दिया जाएगा। इसके खिलाफ अभियान चल रहा है। हर दिन दर्जन भर के करीब नशा बिक्री करने वाले गिरफ्तार कर जेल भेजे जा रहे हैं। बेगमबाग के गढ़ की रीड़ तोड़ने के लिए क्वार्सी पुलिस को विशेष तौर पर निर्देशित किया गया है। दो दिन में अगर यहां फिर से नशा उत्पाद बिक्री की भनक तक लगी तो इलाके के पुलिसकर्मियों पर सीधी-सीधी कार्रवाई की जाएगी।
हत्तू
चरस के पेड़ों से सीधे पत्तियों को तोड़कर हाथ से मल कर उसकी गोली बनाई जाती है। हाथ से मलकर गोलियां बनाएं जाने के कारण इसको हत्तू कहते हैं। 100 रुपये की एक पुड़िया में पांच सिगरेट भरते हैं।
स्मैक
अफीम के पौधे से निकले दूध से बनाया गया ये पाउडर सबसे खतरनाक नशा है। जिसकी लत एक बार लगने के बाद कभी नहीं छूटती है। 100 रुपये में चार से पांच ग्राम भूरे रंग का पाउडर मिलता है।
चरस
इस चरस में एक केमिकल मिलाकर उसे और नशीला बनाया जाता है। इसकी मांग कम होती है, लेकिन नई उम्र के युवा इसको ज्यादा पसंद करते हैं। लगभग 100 रुपये की एक गोली, चार सिगरेट भरते हैं।
गांजा या सुलफा
गांजे के पौधे से तोड़ी गई पत्तियों से बनता है। पौधे की प्रजाति और उसकी ताजा पत्तियों के अनुसार इसकी कीमत तय होती है। 50 रुपये पुड़िया मिलता है। जिसमें तीन सिगरेट तक भरती है।