विपक्षी खेमा मौजूदा जिला पंचायत सदस्य परिवार के बंटी व उनकी मां विरमा देवी ने इस मामले में एक अपील राज्यपाल के यहां, दूसरी मुख्यमंत्री व डीजीपी के यहां दाखिल कर रखी है। साथ में एक हाईकोर्ट में अपील कर रखी है। जिसमें कप्तान सिंह के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए रिहाई न करने और खुद की व परिवार की सुरक्षा को खतरा बताया है। इस मामले में दूसरे पक्ष से पैरवी कर रहे बंटी के भाई राहुल ने बताया कि कप्तान के आपराधिक इतिहास व अन्य तथ्यों के आधार पर तीन तीन अपील रिहाई के खिलाफ हाईकोर्ट में हैं। साथ में शासन में शिकायतें हैं। रिहाई से हमारे परिवार को सुरक्षा का खतरा है।
ये है कप्तान-बंटी गुट में रंजिश
इस रंजिश की नींव प्रधानी चुनाव को लेकर वर्ष 2000 में शुरू हुई। बंटी पक्ष गांव के एक रिश्तेदार के समर्थन में चुनाव में था, जबकि कप्तान ने खुद चुनाव लड़ा गया। कप्तान के प्रधान बनने के बाद एक जमीन को लेकर रंजिश मुखर हुई। सबसे पहले वर्ष 2003 में कप्तान के भाई मनवीर की हत्या हुई। जिसका आरोप बंटी, उसके पिता जगवीर, भाई संजीव आदि पर लगा। इसके बदले में मुकदमे की पैरोकारी कर रहे बंटी के बड़ा भाई वीरेश उर्फ बबलू व चाचा मुन्ना उर्फ हरवीर की 4 जून 2003 की दोपहर अंडला के पास दिनदहाड़े हत्या की गई। इस हत्याकांड में 30 सितंबर 2008 को कप्तान सिंह, रोहताश सिंह, ओमप्रकाश सिंह, राजेंद्र, टीकाराम सिंह, भूरा सिंह उर्फ नेपाल सिंह को आजीवन कारावास की सजा हुई। तभी से वह जेल में है। हाईकोर्ट ने भी उस सजा को बरकरार रखा। उसी दोहरे हत्याकांड में बंटी का दूसरा भाई संजीव गवाह था। जिसमें जेल में रहने के चलते साजिश में कप्तान को पांच वर्ष की सजा हुई। बाकी को उम्रकैद हुई। कप्तान को कम सजा पर बंटी पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील कर रखी है।
कप्तान पर 11 मुकदमों का इतिहास
कप्तान पर कुल 11 मुकदमे हैं। जिनमें खैर के मुकदमों के अलावा दो मुकदमे लूट आदि के बुलंदशहर देहात में व एक मुकदमा दिल्ली में भी लूट का है।