नीम नदी बुलंदशहर से अलीगढ़ की अतरौली तहसील के मलहपुर गांव से प्रवेश करती है। कनकपुर, पनेहरा, नगला बंजारा, खड़ाैआ, आलमपुर, जिरौली होते हुए यह कासगंज में प्रवेश करती है। अलीगढ़ में इसकी लंबाई करीब 40 किमी और चौड़ाई 50 से 100 मीटर तक थी। 20 साल पहले इसके पानी से 25 से अधिक गांवों के लोगों को फायदा होता था। कनकपुर, पनेहरा आदि गांव के लोग इसमें स्नान करते थे। अब इसकी जमीन पर कब्जे हो गए हैं।
करबन नदी
करबन नदी बुलंदशहर के खुर्जा से निकल कर अलीगढ़ के गभाना-खैर में प्रवेश करती है। यह जिले की सबसे लंबी नदी है। इगलास, खैर, सादाबाद, चंडौस आदि कस्बों सहित काफी संख्या में गांव इसके किनारे बसे हुए हैं। हाथरस से निकल कर आगरा के एत्मादपुर के समीप यह यमुना में मिल जाती है। इसलिए इसे यमुना की सहायक नदी कहा जाता है। अब सिर्फ बारिश के समय ही इसमें पानी नजर आता है। अलीगढ़ में इसकी लंबाई लगभग 70 किलोमीटर है। नदी में काफी जगहों पर खोले गए नाले इसको दूषित कर रहे हैं।
काली नदी
काली नदी के दूषित पानी से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। यह मुजफ्फरनगर के खतौली से हापुड़, बुलंदशहर के रास्ते अलीगढ़ पहुंचती है। हरदुआगंज के साधु आश्रम के पास इसका प्रवाह कुछ तेज है। काली नदी गाजीपुर, ग्वालरा, भवनगढ़ी, चेड़ौली, खेड़ा, कलाई, मीरपुर का नगला, सिल्ला, विसावलपुर, बरानदी, धरमपुर का नगला, पोथी आदि गांवों से होकर निकलती है। इसके पानी में ऑक्सीजन शून्य पर पहुंच चुका है।
एक जमाने में अलीगढ़ ही नहीं, इटावा, मैनपुरी व कानपुर तक के लोग ईशन (बाद में सेंगर) नदी के मीठे पानी से प्यास बुझाते थे। बड़गंगा बरला क्षेत्र में बहती थी छोइया जिरौली धूम सिंह के पास से बहती थी। करबन नदी का इलाका इगलास-खैर क्षेत्र हुआ करता था। काली, करबन, सेंगर बारहमासी नदियां हैं। सेंगर नदी का इतिहास काफी पुराना है। इसका नाम पहले वाशिंद नदी था। यह पृथ्वीराज चौहान के समय की है। पनैठी से निकलकर यह अधौन गांव के पास बहती थी।
जल प्रदूषण का प्रमुख कारण
काली व करबन नदी के प्रदूषित होने का कारण अलीगढ़ ड्रेन का दूषित जल इसमें मिलना है। शहर की फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी भी इन्हीं नदियों में जाता है। मथुरा बाईपास स्थित ड्रेन में स्लॉटर हाउस का पानी गिरता है। शहर के सीवर का पानी भी ड्रेन के रास्ते करबन नदी से होते हुए यमुना नदी में गिरता है।