यहां पैदा होने वाली चिकोरी यूक्रेन, ताइवान, तुर्किए, वियतनाम, इंडोनेशिया, बेलारूस, अल्जेरिया, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, मलयेशिया सहित 12 देशों में भेजी जा रही है।
पौधे की जड़ है चिकोरी
चिकोरी एक पौधे की जड़ है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम चिकोरियम एंटीबस है। इसका बीज थाईलैंड से आता है। जिसे अक्तूबर में बोया जाएगा। इसकी फसल मार्च में तैयार होगी। इसकी जड़ में विषाक्तता मुक्त करने के लक्षण होते हैं। ये वजन कम करने और किडनी की पथरी के उपचार में भी मदद करता है। इसमें जिंक, मैग्नीशियम, कैल्शियम, लौह, फोलिक पोटेशियम, विटामिन, ए, बी-6 सी, ई और के होता है। इसकी जड़ को सुखाकर रोस्ट कर काॅफी में मिलाया जाता है।
एटा से 122 करोड़ रुपये की चिकोरी गई विदेश
अलीगढ़। एटा में इसके निर्यात की शुरुआत वर्ष 2007 से हुई थी। उस वक्त एक ही फर्म मुरली कृष्णा चिकोरी ने यह काम शुरू किया था। इसके बाद वर्ष 2015 में मुरली कृष्ण फूड और वर्ष 2016 में जूपिटर फूड प्राइवेट लिमिटेड भी निर्यात में उतर आई है। जिले में लगभग 85 चिकोरी के प्लांट स्थापित है। दस बड़ी कंपनियां इसका पाउडर बना कर निर्यात कर रही हैं।
मुख्य बिंदु
- चिकोरी का 200 करोड़ रुपये का कारोबार
- 184 करोड़ रुपये का निर्यात, 16 करोड़ रुपये की स्थानीय बिक्री
- 04 कॉफी निर्माता कंपनियां स्थानीय स्तर पर कर रही हैं खरीदारी
- 15 चिकोरी प्लांट स्थापित हैं अलीगढ़ के छर्रा और इगलास में
- 3500 बीघा में अलीगढ़ में हो रही है इसकी खेती
- 85 चिकोरी प्लांट स्थापित हैं एटा के अलग-अलग इलाकों में
- 200 हेक्टेयर में हो रही है एटा जनपद में इसकी खेती