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अलीगढ़ः रजा नगर के चौहरे हत्याकांड में चार आरोपी बरी

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महानगर के क्वार्सी क्षेत्र की रजा नगर कॉलोनी में 2004 में हुए चौहरे हत्याकांड के चार आरोपी शुक्रवार को अपर सत्र न्यायालय से बरी कर दिए गए। साक्ष्यों की कमजोरी और बचाव पक्ष की मजबूत पैरवी के दम पर इन चारों आरोपियों को एडीजे-3 की अदालत से यह राहत मिली है। खास बात है कि रात से लापता इन चार लोगों की लाशें इकरा कॉलोनी के पीछे मिली थीं। जिसमें अवैध संबंधों के संदेह पर हत्या का आरोप लगाया गया था।
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इस मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय गौड़ के अनुसार घटना 4 जनवरी 2004 की रजा नगर क्वार्सी की है। इसमें रजा नगर के मजदूरी करने वाले फिरोज, उसके साथी शाहिद, बलिया व वृंदावन रात को घर से कहीं जाने की कहकर गए थे। इसके बाद नहीं लौटे। अगले दिन उनकी लाशें इकरा पब्लिक स्कूल के पीछे मिलीं। इस पर फिरोज के भाई गोला ने मूल रूप से पिलखना हाल रजा नगर निवासी अपने पड़ोसी इकराम, इमरान, इमरान के पिता मूला सूफी, इकराम की पत्नी साइना उर्फ बूंदी को नामजद कर मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमे में आरोप लगाया कि इकराम अपने परिवार के साथ उसके ही मकान में किराये पर रहता था। इकराम को अपने परिवार की एक महिला से फिरोज से अवैध संबंधों का शक था। इसे लेकर इकराम के घर में कलह रहती थी। घटना से कुछ दिन पहले वह महिला अपने मायके चली गई थी।
इसी सिलसिले में घटना की शाम फिरोज अपने साथी शाहिद संग यह कहकर गया कि इकराम व परिवार की महिला के झगड़े के सिलसिले में बात करने चमन के घर जा रहे हैं। इसके बाद वे काफी देर तक नहीं आए। बाद में उन्हें देखने साथ काम करने वाले बलिया व वृंदावन भी चले गए। मगर वे भी नहीं लौटे। अगले दिन इन चारों की लाशें मिलीं। इनके पोस्टमार्टम में उजागर हुआ कि इनका दम घुटा है। पोस्टमार्टम में मौत की वजह भी साफ नहीं हुई। अंदेशा व्यक्त किया गया कि बेहोश करने के बाद इनका दम घुटा है। इस पर पुलिस ने चारों के खिलाफ यह आरोप लगाते हुए चार्जशीट दायर कर दी कि नामजदों ने इन्हें बातों में लगाकर खाने में नशीला पदार्थ खिलाया। जिससे बेहोश हुए। बाद में गला घोंटकर इनकी हत्या कर शव फेंक दिए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय गौड़ के अनुसार सत्र परीक्षण के दौरान न तो कोई गवाह इनके घर जाते का, न खाना खिलाते और न शवों को फेंकते का मिला। जिससे आरोप साबित हो सकें। विसरा रिपोर्ट भी प्राप्त नहीं हुई। साथ में आरोपियों की पहले दिन से दलील थी कि इन्हें बेवजह रंजिश में फंसाया गया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर चारों आरोपियों को न्यायालय ने शुक्रवार को बरी कर दिया।
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- इस प्रकरण में उनके क्लाइंटों को पुलिस ने गलत फंसाकर जेल भेजा था। पुलिस विवेचना में किसी तरह के मजबूत साक्ष्य पेश नहीं किए गए। इसी आधार पर हमारी अपील न्यायालय ने सुनी है और चारों का बरी किया है।
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- अजय गौड़, एडवोकेट, बचाव पक्ष
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