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अलीगढ़ः ब्लैकमेल करने वाले गिरोह पर गैंगेस्टर में चार्जशीट

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अपहरण व दुष्कर्म जैसे फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर लोगों को ब्लैकमेल करने वाले गिरोह पर हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई गैंगेस्टर की कार्रवाई में पुलिस ने पांच साल बाद चार्जशीट दायर की है। इसे लेकर इस गैंग के पीड़ितों ने अब राहत तो महसूस की है, मगर इस गैंग के नए कारनामे भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें न्यायालय व पुलिस के सामने रखने की तैयारी है।
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वाकया अप्रैल 2016 का है, जब हाईकोर्ट में दायर याचिका में इस गैंग के कई मुकदमों का विवरण रखते हुए कार्रवाई का अनुरोध किया था, जिसमें आरोप था कि यह गैंग लोगों पर झूठे मुकदमे फर्जी वादी व गवाह खड़े कर दर्ज कराता है। बाद में उनसे सुलहनामे के नाम पर रकम ऐंठता है। मामले में हाईकोर्ट ने जब जिला पुलिस को तलब किया तो उस समय अलग-अलग पांच मुकदमों के आधारी पर सिविल लाइंस में शिवकुमार, भूरी देवी, सत्यवीर सिंह, नेत्रपाल सिंह, अशोक, सतीश, प्रवीन, शिवचरण लाल पर गैंगेस्टर में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में पैरवी कर रहे पीड़ित किशन कुमार सिंघल के अनुसार तमाम प्रयास के बाद पांच साल बाद विवेचक क्वार्सी पुलिस ने अब कुछ दिन पहले चार्जशीट दायर की है। जिसमें इन आरोपियों के अलावा एक अन्य महिला को भी आरोपी बनाया है।
इधर, किशन कुमार सिंघल के अनुसार मामले में गैंग अभी भी इस तरह की घटनाओं में शामिल है। कुछ तथ्य और उजागर हो रहे हैं, जिन्हें वे पुलिस व न्यायालय के पटल पर रखने जा रहे हैं। साथ में इस गैंगेस्टर में कुछ वांछितों की गिरफ्तारी का भी अनुरोध करेंगे।
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असली भूरी कौन, आज तक नहीं हुआ स्पष्ट
किशन कुमार सिंघल के अनुसार उनके परिवार के खिलाफ झूठे मुकदमे में वादी बनी भूरी देवी ने न्यायालय में अपने पिता का नाम कुछ और बताया है। वह खुद को यह साबित करने का प्रयास करती है कि किशन कुमार के परिवार पर मुकदमा दर्ज कराने वाली वह भूरी देवी नहीं है। इसलिए इस मामले में पुलिस स्तर से आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आखिर भूरी देवी कौन असली है।
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