प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते हैं अक्षत
संत फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र व स्वर्ण जयंती नगर के गैलेक्सी टॉवर निवासी अक्षत भारद्वाज प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते हैं। अक्षत ने बताया कि उन्होंने प्रतिदिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई की थी। कई बार तो सुबह के चार बजे तक पढ़ाई करते रहते थे। विनीत कोचिंग ने पढ़ाई कराने के लिए काफी सपोर्ट किया। आज जिला टॉपर बनकर महसूस हो रहा है कि सालभर की गई मेहनत आज सफल हो गई है। अक्षत ने सीबीएसई दसवीं की कक्षा में 99.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। अक्षत ने बताया कि बहन अरुणी भारद्वाज व शिक्षकों ने इस सेवा में जाने के लिए काफी प्रेरित किया है। अक्षत ने बताया कि पिता अलीगढ़ में जल निगम में कार्यरत हैं। जबकि मां शैली पाठक ग्रहणी हैं।
डॉक्टर बनकर सेवा करना चाहती हैं ध्रुवी
ज्ञान सरोवर कॉलोनी निवासी ओएलएफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा ध्रुवी वार्ष्णेय ने 99.3 प्रतिशत अंक पाकर जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। ध्रुवी ने बताया कि वह डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करना चाहती हैं। इसके लिए कक्षा दस में काफी मेहनत की। रात दो बजे तक पढ़ाई करती रहती थी। करीब 14 से 16 घंटे पढ़ाई का रुटीन बना रखा था। ध्रुवी की मां सुरभि वार्ष्णेय ओएलएफ में शिक्षिका हैं और चाचा डॉ. गौरव वार्ष्णेय चंडीगढ़ पीजीआई में डॉक्टर हैं। जिन्होंने हमेशा डॉक्टर बनने की प्रेरणा दी है। जबकि पिता कामर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट में इंस्पेक्टर हैं।
मैकेनिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं कृष्ण कुमार
बाबूजी कान्वेंट स्कूल जट्टारी के छात्र कृष्ण कुमार भविष्य में मैकेनिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि चाचा विकास चौधरी ने इस क्षेत्र में जाने की प्रेरणा दी है। 99.3 फीसदी अंक लाकर जिले में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले कृष्ण कुमार ने बताया कि उनके पिता बेसिक स्कूल में शिक्षक हैं। जिन्होंने हमेशा बड़े होकर अच्छा बनने की प्रेरणा दी है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काफी रुचि है। इसीलिए गणित और विज्ञान में सबसे ज्यादा पढ़ाई की। गणित के फार्मूले के आधार पर कठिन सवाल हल करने में काफी मेहनत की। इसी का नतीजा रहा कि अच्छे नंबर आए हैं। कहीं दिक्कत होती तो अगले दिन शिक्षकों से उसका समाधान ढूंढते थे। उन्होंने बताया कि मां अनीता देवी ग्रहणी हैं। जबकि बड़े भाई शिवम कुमार बीएससी कर रहे हैं।
डॉक्टर बनना चाहते हैं अरुण राजपूत
संत फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र अरुण राजपूत ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहते हैं। बचपन से ही जीव विज्ञान में रुचि रही है। इसी रुचि की बदौलत खूब मेहनत कर डॉक्टर बनने का ख्वाब देखा है। वहीं, कोरोना के समय जब डॉक्टरों की भूमिका अग्रणी रही तो और भी इस पेशे के प्रति आकर्षित हुआ है। अरुण राजपूत ने बताया कि वह तीन घंटे की सेल्फ स्टडी किया करते थे। कोरोना के चलते हुई ऑनलाइन पढ़ाई काफी फायदेमंद साबित हुई। उन्होंने बताया कि स्कूल की छह घंटे की पढ़ाई चार घंटे में ही पूरी हो जाती थी। बचे दो घंटे में पढ़ाई का रिवीजन कर लेते थे। कम समय में अधिक पढ़ाई कर यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि पिता बदायूं जिले में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। जबकि मां प्रमिला देवी ग्रहणी हैं। विज्ञान विषय पढ़ने में सबसे अच्छा लगता है।