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स्मार्ट सिटी की बदहाल तस्वीर: कभी यहां भी आइए जनाब... कहने को तो शहर है लेकिन हालात गांव से भी खराब

Thu, 18 Jul 2024 03:34 PM IST
चमन शर्मा इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

इन गांवों को ही 2017-19 के बीच अलीगढ़ नगर निगम में शामिल किया गया। प्रधान की जगह पार्षद के चुनाव होने लगे। ग्रामीण खुद को शहरी मानने लगे। लेकिन यहां समस्याओं का मानो पूरा समुंदर खड़ा हो।
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सारसौल मां काली मंदिर वाली गली वार्ड नंबर 32 में भरा पानी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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वैसे तो ये इलाके अलीगढ़ महानगर का हिस्सा हैं। स्मार्ट सिटी के नक्शे में भी दर्ज हैं। लेकिन विकास की तस्वीर इतनी धुंधली है कि जनपद के अधिकांश गांव इन मुहल्लों से अच्छे होंगे। जी हां हम यहां बात कर रहे हैं उन गांवों की ही 2017-19 के बीच नगर निगम में शामिल कर लिए गए। प्रधान की जगह पार्षद के चुनाव होने लगे। ग्रामीण खुद को शहरी मानने लगे। लेकिन यहां समस्याओं का मानो पूरा समुंदर खड़ा हो। न शुद्ध पानी है। शाम ढले ही सड़कों पर अंधेरा छा जाता है। रास्ते इतने जर्जर कि निकलना मुश्किल। पानी निकासी का इंतजार नहीं लिहाजा बरसात में सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं। यहां के लोगों का कहना है कि महानगर में शामिल होकर गृहकर और जलकर का बोझ तो पड़ गया मगर सुविधा कुछ नहीं मिली।

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2017 से 2019 के बीच नगर निगम की सीमा में 35 गांवों को शामिल किया गया था। जब यह गांव महानगर का हिस्सा बने तो यहां के लोगों में विकास की एक उम्मीद बंधी थी। उन्हें लगा था कि अब अच्छी सड़कें होंगी। पानी निकासी के बेहतर प्रबंध होंगे। शुद्ध पानी घर घर तक पहुंचेगा। पथ प्रकाश की उचित व्यवस्था होगी। लेकिन एक लंबा समय बीत जाने के बाद भी उम्मीद अधूरी ही है। इन गांवों को मिलाकर 1,32,36,40 और 41 वार्ड तो बना दिए लेकिन यहां को लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। बस इतना जरूर हुआ कि इनसे गृहकर और जलकर की वसूली होने लगी।

बदहाल पांच वार्ड

वार्ड : नंबर 1 (कमालपुर रोड मान सिंह नगला)
आबादी : 10 हजार
वार्ड में हैंडपंप खराब हैं। गलियों में जलभराव है। नगर निगम में शामिल होने के बाद विकास कार्य नहीं हुए। - ओमवती, पार्षद
नाला गंदगी से अटा है। बाईपास पर जलभराव है। सड़कें नहीं बन पाईं। विकास कार्य यहां से दूर है। -देवीराम, क्षेत्रीय निवासी

वार्ड नंबर : 32 (चंद्रलोक कॉलोनी, सारसौल रोड)
आबादी : 11 हजार
इलाके में जलभराव की समस्या बहुत है। क्षेत्र में नगर निगम को विकास कार्य कराने होंगे। - हरिशंकर, पार्षद
जलभराव से इलाके के लोग परेशान हैं। गृहकर व जलकर देने के बाद भी काम नहीं हो रहा। - पंकज शर्मा, क्षेत्रीय निवासी

वार्ड नंबर : 36 (नगला डालचंद)
आबादी : 9 हजार
विकास कार्य कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ूंगी, नगर निगम से भी सहयोग मिलना चाहिए। - स्नेहा सिंह बघेल, पार्षद
गंदगी बहुत रहती है। लाइटें खराब हैं। समस्याएं बहुत हैं। महापौर को यहां भी ध्यान देना चाहिए। - कैलाश कुमार, क्षेत्रीय निवासी

वार्ड नंबर : 40 (सारसौल)
आबादी : 11 हजार
गली कच्ची है। बारिश में निकलना मुश्किल हो जाता है। नगर निगम को ख्याल रखना चाहिए। - हितेश कुमारी, पार्षद
सड़कें और गलियों की दशा काफी खराब है। लगता ही नहीं है यह नगर निगम का हिस्सा है। - अतुल, क्षेत्रीय निवासी

वार्ड नंबर : 41 (असदपुर कयाम)
आबादी : 10 हजार
साफ-सफाई नहीं होती है। गंदगी से नाले अटे पड़े हैं। इससे भला तो हमारा गांव ही था।-अशोक कुमार, क्षेत्रीय निवासी
वार्ड में लगातार विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जो कार्य अधूरे हैं, उन्हें भी पूरा कराएंगे।- निरंजन सिंह बघेल, पार्षद
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ये गांव हुए थे नगर निगम में शामिल


2017-19 के बीच सिंधौली, अली नगर, पानखानी, भदेशी माफी, पड़ियावली, रुस्तमपुर, सकत खां, नगला मंदिर, हाजीपुर चौहट्टा, दौलारा, निरपाल, खेड़िया ख्वाजा बुजुर्ग, भकरौला, आसना, बढ़ोली फतेह खां, सुखरावली, देवसैनी, तालसपुर, धनीपुर, असदपुर कयाम, महेशपुर (आंशिक), मंजूरगढ़ी (आंशिक), रामगढ़ पंजीपुर (आंशिक), क्वार्सी, धौर्रामाफी, बरौला जाफराबाद, सारसौल, एलमपुर गड़िया, अलापुर गड़िया, अशरफपुर जलाल, रोरावर, मुल्लापाड़ा भुजपुरा, दौलताबाद, पला साहिबाबाद, गंभीरपुरा, किशनपुर को नगर निगम में शामिल किया गया था।
गांवों के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार हो गई है। विकास कार्य पहले से कराए जा रहे हैं। नगर निगम में शामिल नए वार्डों का समुचित विकास कराना प्राथमिकताओं में शुमार है। - प्रशांत सिंघल, महापौर नगर निगम।
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