चाक चौबंद, चुस्त दुरुस्त, चप्पे चप्पे पर पैनी नजर, कड़ी सुरक्षा। अक्सर ये भारीभरकम शब्द पुलिस की ‘ताकत’ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। लेकिन रविवार को भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की जिद और उनके मुखबिर तंत्र ने इन सभी शब्दों को ‘कमजोर’ साबित दिया। पुलिस की ‘ठोस’ सुरक्षा ‘पिघलती’ रही और आजाद खुर्जा से सीधे मेडिकल कॉलेज के अंदर तक पहुंचने में सफल रहे। इसकी सही वजह यह रही कि चंद्रशेखर आजाद की मुखबिरी गभाना टोल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक बेहद दुरुस्त थी। चूंकि, अंदरखाने सरकार व भाजपा विरोधी एक बड़ी लॉबी जो कैंपस के अंदर से लेकर बाहर तक काम कर रही थी।
हालांकि, पुलिस ने चंद्रशेखर को जिले में प्रवेश करने से रोकने के लिए सुबह नौ बजे से तैयारी कर मोर्चा लगा दिया था, गभाना टोल पर आजाद समर्थकों के साथ पुलिस की खासी हुज्जत भी हुई, लेकिन शाम साढ़े तीन बजे तक पुलिस के पास चंद्रशेखर की सही लोकेशन तक नहीं थी। इसीलिए वह आराम से बाइक से सीधे मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। जी हां, पुलिस की ‘कड़ी’ सुरक्षा व्यवस्था का ये सबसे बेहतरीन उदाहरण है। इससे उलट चंद्रशेखर समर्थकों ने पुलिस की तैनाती, उसकी हलचल, नाकेबंदी की एक एक खबर चंद्रशेखर तक समय से पहुंचाई। जिससे वह अपने एलान के तहत अस्पताल तक पहुंचे और पीड़ित परिवार से मिले भी।
दरअसल, चंद्रशेखर को अलीगढ़ आने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने जेवर टोल प्लाजा, टप्पल इंटरचेंज, गभाना टोल प्लाजा सहित शहर आने के सभी रास्ते पर नाकेबंदी की थी। शनिवार देर रात तक चंद्रशेखर को अलीगढ़ आने की कोई मनाही नहीं थी, लेकिन सुबह रविवार सुबह एकाएक हाथरस पुलिस का संदेश सामने आने के बाद अलीगढ़ पुलिस सख्त हो गई। सुबह से ही यहां भी सुरक्षा बढ़ाई गई और अमला लगाया गया, लेकिन सारी कवायद का नतीजा जीरो हो गया। पुलिस जहां जहां रही, वहां चंद्रशेखर के जासूस पहले से ही मौजूद थे और वह उसको पूरी खबर दे रहे थे। जिसके अनुसार चंद्रशेखर ने अपनी तैयारी की और वह अलीगढ़ आए।
चंद्रशेखर ने पहले खुर्जा से गभाना के रास्ते अलीगढ़ आने की योजना बनाई थी, उसकी लोकेशन भी 11 बजे के आसपास गाजियाबाद के इंदिरापुरम में मिली थी। मगर सिकंदराबाद में ही नाकाबंदी होने के कारण वह सिकंदराबाद से सीधे बस से आने के लिए चला। खुर्जा के आसपास बस पंचर हो गई तो वह बाइक से ही अपने समर्थक के साथ खुर्जा से अमरौली, जवां के रास्ते से नगला पटवारी होते हुए धौर्रा पहुंचे और वहां मेडिकल कॉलेज की पुरानी इमारत से सीधे डेंटल कॉलेज होते हुए प्रधानाचार्य दफ्तर के सामने से अंदर दाखिल हो गए। जब वह पुरानी इमरजेंसी के ऊपर बने वार्ड की ओर बढ़े तब पुलिस ने उनको रोका। इस दौरान चंद्रशेखर के अपने जासूसों ने पुलिस की पूरी मुखबिरी को जीरो कर दिया। जो अंदर यह बताने तक उनकी मदद कर रहे थे कि बेटी किस वार्ड में है और पुलिस से बचकर जाने का रास्ता कहां से आसान है।