मिठाई की दुकान पर खरीदारी करते लोग।
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मिठाई का कारोबार अनुमान से अधिक होने से कारोबारी खुश हैं। यह अलग बात है कि पिछले साल की तुलना में करीब 50 प्रतिशत या इसके आसपास ही कारोबार हुआ है। खुशी का सबसे बड़ा कारण यह है कि दुकानदारों को पहले उम्मीद नहीं थी कि लॉकडाउन में दुकानें खुलेंगी और खुलेगी भी तो बड़ी संख्या में ग्राहक आएंगे।
पिछले कई दिनों से अलीगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के मिठाई कारोबारी शनिवार एवं रविवार को (लॉकडाउन में) दुकान खोलने की अनुमति देने की मांग कर रहे थे। शनिवार शाम तक दुकान खोलने की अनुमति नहीं मिली थी। इसकी वजह से व्यापारियों ने घेवर व अन्य मिठाइयों का ज्यादा स्टाक नहीं किया था। शनिवार रात को मिठाई की दुकान खुलने की अनुमति मिलने बाद कारोबारी घेवर एवं अन्य तैयारियों में जुट गए। उनके पास दो दिन का मौका है। दीपावली के बाद सबसे अधिक मिठाई रक्षाबंधन पर ही बिकती है। अनुमानित तौर पर जिले में करोड़ों का कारोबार होता है। रविवार सुबह से दुकानों पर ग्राहकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो रात दुकान बंद होने तक जारी रहा। कई बार दुकानों पर भीड़ लगने की वजह से ग्राहकों ने सामाजिक दूरी का भी ख्याल नहीं रखा।
मिठाई व्यवसायी सुमित अग्रवाल कुंजीलाल ने बताया कि मिठाई का कारोबार अनुमान से अधिक हुआ है। दुकान खोलने की अनुमति देने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद। कारोबारी राजीव जलाली कहते हैं कि अनुमान से अधिक ग्राहक घर से निकले हैं। पिछले साल की तरह तो बिक्री नहीं हुई लेकिन उम्मीद से अधिक कारोबार हुआ है। कई लोगों के स्टाक खत्म हो गए। लॉकडाउन में ऐसे कारोबार की उम्मीद किसी को नहीं थी। मामू भांजा के मिठाई कारोबारी प्रदीप ख्यालीराम का कहना है कि समय को देखते हुए कारोबार को ठीक कहा जा सकता है। लेकिन पिछले साल या उसके पिछले साल की तुलना करने की स्थिति नहीं है। 50 प्रतिशत से भी कम कारोबार हुआ है।
400 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिका घेवर
कोरोना महामारी एवं पहले से तैयारी नहीं होने के कारण इस बार बाजार में घेवर की बहुत वैरायटी नहीं थी। सादा, मावा, काजू बादाम आदि के घेवर की ज्यादा मांग थी। राजीव जलाली ने बताया कि इस साल घेवर के रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी।