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अलीगढ़: बेखौफ आवारा कुत्ते बन रहे आबादी के लिए बड़ा खतरा

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दीपक शर्मा
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अलीगढ़। शहर में आवारा और लावारिस कुत्तों का खौफ नागरिकों के लिए नया खतरा बन रहा है। प्रशासन की तमाम कवायद के बाद भी इस समस्या पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। अकेले मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले मरीजों की संख्या 250 से तीन सौ के बीच रहती है। इसमें अगर दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त अस्पताल, निजी क्लीनिक व नर्सिंग होम, अर्बन पीएचसी, 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आदि जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा प्रतिदिन तीन हजार को पार कर जाता है।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर यशपाल रावल कहते हैं इस समय दीनदयाल सहित अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाने का काम नहीं हो रहा है, क्योंकि उसको कोरोना हॉस्पिटल घोषित कर दिया गया है। डॉ. राहुल कहते हैं कि जिला अस्पताल में आसपास के जनपदों से भी लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं। उनकी समस्या को देखते हुए मना भी नहीं किया जा सकता। डॉ. रावल कहते हैं इसमें मृत्यु दर 100 प्रतिशत है। अगर समय पर उपचार न मिले तो मरीज की मौत निश्चित है। हालांकि मौजूदा हालात में एंटी रेबीज की पर्याप्त उपलब्धता के चलते मृत्यु के केस बहुत कम होते हैं।
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कुत्तों बंदरों के आक्रामक व्यवहार के लिए भोजन की परिस्थितियां जिम्मेदार
अलीगढ़। केवल कुत्ते ही नहीं अब तो बंदर भी आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ साइंस विभाग के प्रोफेसर अफीफुल्ला कहते हैं कुत्तों और बंदरों के आक्रामक व्यवहार के लिए उनके लिए भोजन की उपलब्धता की परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। बंदर आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ते हैं, क्योंकि यहां पर उनको खाना मिलता है। जंगल सिमटते जा रहे हैं। कुत्तों के लिए भी भोजन की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। जबकि उनकी आबादी बढ़ती जा रही है।
नगर निगम झाड़ लेता है पल्ला
अलीगढ़। नगर निगम की दलील है कि उनके पास कैटल कैचर है, लेकिन वह आवारा पशुओं के पकड़ने के लिए है। कैटल कैचर दस्ते के प्रमुख कहते हैं कि कुत्ते पकड़ने के लिए उनके पास कोई आदेश नहीं है। दूसरी ओर नगर निगम कुत्ते पकड़ने के लिए अब तक 20 लाख रुपये से अधिक का नेट खरीद चुका है। नगर निगम के कर निरीक्षक और जोनल प्रभारी राजेश कुमार गुप्ता कहते हैं कि नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों से निपटने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं नगर निगम के पास कैटल कैचर दस्ता है, जिसका मुख्य काम आवारा पशुओं को पकड़ना है, लेकिन अगर कोई शिकायत पागल कुत्ते आदि को लेकर आती है तो फिर कैटल कैचर दस्ता उसको भी पकड़ता है।
मथुरा की एजेंसी ने कुत्ते पकड़ने से हाथ खड़े किए
अलीगढ़। कुत्ते और बंदर पकड़ने के लिए मथुरा की एक एजेंसी अलीगढ़ आने से मना कर चुकी है। क्योंकि इसका पहले का ही भुगतान नहीं हुआ है। इसलिए इस एजेंसी ने अलीगढ़ आकर कुत्तों और बंदरों के लिए जाल बिछाने से ही इंकार कर दिया।
कुत्तों के साथ बंदरों का भी आतंक, पर कोई सुनने को तैयार नहीं: गुलजार अहमद
अलीगढ़। ऊपरकोट निवासी समाजसेवी गुलजार अहमद कहते हैं कि शहर के देहली गेट क्षेत्र में कुत्तों का सबसे अधिक आतंक है। यहां के मोटर वाला चौक के रहने वाले कई लोगों को पिछले दिनों कुत्तों ने अपना निशाना बनाया है। जिसके चलते पीड़ित लोगों को बहुत मुसीबत से गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में नगर निगम में शिकायत की और कुत्ते पकड़ने के लिए कैटल कैचर लाने के लिए कहा, लेकिन नगर निगम ने स्पष्ट कह दिया कि वह कुत्ते नहीं पकड़ सकते, क्योंकि इस तरह का अभियान चलाने पर पशु प्रेमी आपत्ति करते हैं। जबकि यह आवारा कुत्ते आम राहगीरों से लेकर स्थानीय बच्चों तक के लिए बहुत खतरा बने हुए हैं। इसी तरह इलाके में बंदरों का भी आतंक है, लेकिन बंदरों को तो पकड़ने की बात करने पर ही हंगामा हो जाता है।
क्या कहते हैं पीड़ित
पिछले दिनों आवारा कुत्तों ने गिरकर बुरी तरह जख्मी कर दिया। एंटी रेबीज के साथ-साथ सर्जरी भी करानी पड़ी। कई बार नगर निगम और प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन इस ओर कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता है।
-शानू, निवासी मोटर वाला चौक
केवल देहली गेट के क्षेत्र की बात करें तो यहां पर पिछले 2 महीनों में 20 से अधिक बच्चों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है । यह बच्चे बुरी तरह घायल हो गए। इनमें से कुछ बच्चे खाने पीने का सामान लेकर घर जा रहे थे। तो कुछ रास्ते से गुजर रहे थे। ऐसा लगता है प्रशासन और नगर निगम को आवारा कुत्तों की कोई समस्या लगती ही नहीं है।
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- साजिद, निवासी मोटर वाला चौक
कुत्ते के काटने पर सबसे पहले करें यह उपाय
मलखान सिंह जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर यशपाल रावल कहते हैं कि अगर किसी को कुत्ते ने काट लिया है तो सबसे पहले 10 मिनट तक साथ बहते हुए पानी में जख्म को साफ करें। अगर साबुन से साफ कर सकते हैं तो और भी अच्छा है। कहीं पर अगर बहता हुआ पानी उपलब्ध नहीं है तो बाल्टी में पानी लेकर उसको मग्गे से 10 मिनट तक जख्म पर डालते रहें। जख्म पर किसी भी प्रकार की मिर्ची या नमक को न लगाएं। इसके बाद नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पर चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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