अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
मुनीर मेहताब। बिजनौर में एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना की सनसनीखेज हत्या को अंजाम देने वाले पश्चिमी यूपी के इस कुख्यात अपराधी का अलीगढ़ से गहरा नाता है। कहें तो अलीगढ़ में ही इसने अपराध की एबीसीडी सीखी।
फिर पश्चिमी यूपी के साथ-साथ लखनऊ और दिल्ली तक में सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को चकरघिन्नी बनाया। मगर तंजील दंपती की हत्या के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। यूपी पुलिस, एसटीएफ, एनआईए, आईबी, एटीएस आदि एजेंसियों ने पूछताछ की तो उसने बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए। उसने महज 25 साल की उम्र में जरायम दुनिया में नाम कमाने के लिए और अपने शौक पूरे करने के लिए ज्यादातर सनसनीखेज अपराध करना स्वीकारा। आज बिजनौर की अदालत द्वारा मुनीर को दस साल कैद की सजा सुनाई गई है। इस खबर की अलीगढ़ में बेहद चर्चाएं हैं।
एसटीएफ से संबद्ध टीम अलीगढ़ ने किया था मुनीर गिरफ्तार
एएमयू के छात्र गुटों की अदावत में सक्रिय मुनीर और उसके बेहद करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा के नाम अलीगढ़ पुलिस के लिए नए नहीं थे। कई घटनाओं में उनके नाम सामने आए। मगर कारोबारी फहद की हत्या के बाद अलीगढ़ पुलिस आशुतोष की गिरफ्तारी में सफल रही और मुनीर चकमा दे गया।
इसके बाद उसने फरारी में ही एएमयू छात्र आलमगीर की हत्या को अंजाम दिया। उसके बाद से पुलिस उसे तलाश रही थी। इसी बीच 2 अप्रैल 2016 को तंजील दंपती की हत्या में 7 अप्रैल को उसका नाम सामने आया। हालांकि एनआईए डीएसपी तंजील उस समय पाकिस्तानी घुसपैठ से जुड़े किसी घटनाक्रम की जांच कर रहे थे।
उनकी हत्या के बाद एनआईए, आईबी, दिल्ली स्पेशल सेल आदि का अंदेशा हुआ कि कहीं ये हत्या किसी देश विरोधी संगठन का काम तो नहीं। मुनीर भी कहीं ऐसे ही संगठन के लिए काम तो नहीं करता। इन तमाम सवालों के जवाब मुनीर की गिरफ्तारी के बाद ही मिलने वाले थे।
ऐसे में मुनीर की गिरफ्तारी के लिए अलीगढ़ पुलिस में तैनात तेजतर्रार मुखबिर नेटवर्क वाले थाना प्रभारी अजय कौशल, एसओजी में कार्यरत राकेश यादव, दुर्विजय सिंह व फिरोज खान को एसटीएफ लखनऊ यूनिट से संबद्ध किया गया। इन चारों ने दो महीने के प्रयास के बाद मुनीर को 26 जून को नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर के एक मकान से दबोच लिया।
चूंकि उससे राज उगलवाने थे, इसलिए उसका जिंदा पकड़ा जाना बेहद जरूरी था। जब उससे सभी एजेंसियों ने अलग-अलग पूछताछ की तो सभी हैरान रह गए। तंजील की हत्या जरूर उसने निजी दुश्मनी में की। बाकी हत्याएं व अन्य अपराध उसने सिर्फ दोस्तों की अदावत में, अपने शौक पूरे करने के लिए या टशन में किए। किसी अपराध के पीछे कोई मकसद न था।
टूटा टास्क, सऊ को आज तक न पकड़ सकी पुलिस
मुनीर के साथ-साथ अलीगढ़ व बिजनौर से ही 50-50 हजार के इनामी सऊद की गिरफ्तारी भी होनी थी। इसी टीम ने इस दौरान प्रयास कर मुनीर के दूसरे साथी अतीउल्लाह को नेपाल से, शादाब को आजमगढ़ से गिरफ्तार किया। मगर सऊद हाथ न लग सका। उसके विषय में इनपुट मिला कि वह मुनीर से पहले दुबई चला गया और गिरफ्तारी के दिन मुनीर भी मुंबई निकलने वाला था।
वहां से उसे दुबई जाना था। मगर सटीक व सही समय पर सूचना मिलने पर उसे दबोच लिया गया। फिर सऊद को दुबई से लाने के लिए इसी टीम के पासपोर्ट तक बनवाए गए। इसी बीच यूपी पुलिस विधानसभा चुनाव में व्यस्त हो गई। फिर टास्क टूट गया और आज तक सऊद की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
आज तक न मिला टीम को इनाम
इस गिरफ्तारी के बाद दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चारों की टीम को खूब बधाई मिली। डीजीपी स्तर से दो लाख के इनाम की घोषणा हुई। मगर आज तक वह इनाम नहीं मिल सका।
न रखता था मोबाइल, न करता था संपर्क
इस गिरफ्तारी के लिए लगातार दो महीने तक परेशान रही टीम के सामने मुनीर को पकड़ना चुनौती थी। वह न तो मोबाइल रखता था और न किसी से संपर्क करता था। जब भी उसे किसी से बात करनी होती थी तो सीधे उसके पास पहुंचकर बात करता था। इस दौरान मुनीर के कुछ ऐसे संपर्क टीम ने रडार पर लिए, जिनके विषय में उम्मीद थी कि कभी तो मिलने आएगा। बस उसी सहारे यह सफलता मिली थी।
2018 के बाद से वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी
2016 में मुनीर गिरफ्तारी के बाद सितंबर माह में अलीगढ़ पुलिस की रिमांड पर आया। इस दौरान उसने अलीगढ़ से जुड़े सभी अपराध स्वीकारे। इसके बाद न्यायालयों में कुछ मुकदमों में ट्रायल के लिए वह आया। आखिरी बार वह 2018 में पेशी पर आया। तभी एसटीएफ ने उसके विषय में भागने संबंधी रिपोर्ट दी और तभी से उसकी वीडियों कांफ्रेंसिंग से पेशी चल रही है।
आखिर कहां गई सिपाही से लूटी गई पिस्टल
अलीगढ़ के पान दरीबा में उसने जीआरपी सिपाही रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या कर जो सरकारी पिस्टल लूटी थी। उसका आज तक पता नहीं लगा। पुलिस सूत्र बताते हैं कि मुनीर से रिमांड के दौरान उस पिस्टल के सुराग पुलिस को मिल गए थे। मगर पुलिस उसे आज तक बरामद नहीं कर सकी। कुछ सूत्र बताते हैं कि पिस्टल मिल गई, मगर उसे कुछ तकनीकी कारणों से पुलिस दर्शा नहीं सकी। कुल मिलाकर इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
-एसटीएफ/पुलिस की पूछताछ में स्वीकारे थे मुनीर ने ये 27 अपराध--
- सिविल लाइंस में हमला, सिविल लाइंस में हत्या, सिविल लाइंस में अवैध ठिकाना, दिल्ली में लूट, दिल्ली में लूट, सिविल लाइंस में हमला, क्वार्सी में हमला, सिविल लाइंस में हमला, क्वार्सी में पिस्टल लूट, सिविल लाइंस में बाइक लूट, सिविल लाइंस में 32 लाख की लूट, बन्नादेवी में 35 लाख की लूट, क्वार्सी में रोडरेज में हत्या, दिल्ली में हत्या-पिस्टल लूट, क्वार्सी में बाइक लूट, सिविल लाइंस में हत्या, दिल्ली में डेढ़ करोड़ की लूट, क्वार्सी में पिस्टल लूट, सिविल लाइंस में सिपाही की हत्या-पिस्टल लूट, बरला में हत्या, दिल्ली में बाइक लूट, सिविल लाइंस में आलमगीर की हत्या, लखनऊ में हत्या-लूट, लखनऊ में हमला पिस्टल लूट, धामपुर में 91 लाख की लूट, बिजनौर में तंजील दंपती की हत्या। (इनमें कई मुकदमे ऐसे, जिनमें पुलिस अन्य अपराधियों को जेल भेज चुकी। गिरफ्तारी के बाद मुनीर ने स्वीकारे।)
न्यायालय में अलीगढ़ के ये मुकदमे विचाराधीन
1-एएमयू छात्र तल्हा पर हमला किया गया।
2-पीडब्ल्यूडी ठेकेदार से क्वार्सी में पिस्टल लूट।
3-सिविल लाइंस इलाके में पल्सर बाइक लूट।
4-मीनाक्षी पुल पर 32 लाख रुपये की लूट की।
5-रेलवे रोड पर 35 लाख रुपये की लूट की।
6-सिविल लाइंस में कारोबारी फहद की हत्या।
7-क्वार्सी में तालशपुर प्रधान की पिस्टल लूटी।
8-पान दरीबा में सिपाही की हत्या, पिस्टल लूट।
9-एएमयू छात्र आलमगीर की दिनदहाड़े हत्या।