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भाषा संस्कृति को छोड़ने से संकट में है राष्ट्र : आचार्य स्वदेश महाराज

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मथुरा से आए आचार्य स्वदेश महाराज ने कहा है कि भाषा एवं संस्कृति को छोड़ने के चलते राष्ट्र संकट में है। संस्कृति ही राष्ट्र की आत्मा है। युवाओं को अपनी संस्कृति को अपनाकर राष्ट्र को सुदृढ़ बनाना है। आचार्य स्वदेश सिद्घि विनायक फार्म हाउस नादा पुल खैर रोड पर आर्य वीर दल के तत्वावधान में प्रांतीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आर्य वीरों को ब्रह्मचर्य का भी ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति केवल 20 शास्त्रों में ही बताई गई है। आचार्य ने योग दर्शन के हवाले से संस्कृति की 10 मर्यादा तथा पांच यम नियमों के बारे में बताते हुए व अहिंसा की व्याख्या की।
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उन्होंने कहा कि मन, वचन, कर्म से किसी के मन तथा स्वयं में कोई विकृति पैदा न करना ही अहिंसा है। कर्म करना तो सब जानते ही हैं। वचन की हिंसा भी बहुत लोग जानते हैं। मन की हिंसा न कोई जान रहा है और न जानना चाह रहा है। सभा के प्रधान रविकर आर्य ने बताया कि कार्यक्रम में प्रतिदिन की भांति संध्या व लाठी, भाला, जूडो कराटे का प्रशिक्षण चल रहा है। यह प्रशिक्षण सार्वदेशिक आर्य वीर दल के अध्यक्ष स्वामी देवव्रत सरस्वती दे रहे हैं। इस अवसर पर रामकिशन शर्मा, पंकज आर्य, बॉबी आर्य, भूदेव मुनि, जितेंद्र शर्मा, राजकुमार सारस्वत आदि उपस्थित थे।
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