अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा स्वर्ण जयंती नगर फेस-2 योजना में पानी की टंकी के पास 6 बिस्वा भूखंड पर आवासीय परिसर विकसित करने पर सवाल खड़ा हो गया है। न्यायालय ने एडीए की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें 2012 में सिविल न्यायालय ने एडीए के अधिग्रहण को गलत करार दिया था। यानी किसान की जमीन का अधिग्रहण कर प्लाट आवंटन करना गलत माना था। उस आदेश के खिलाफ एडीए ने अपील अर्जी दायर कर रखी थी, जिसे अब अपर सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या एडीए ने अवैध कब्जा कर प्लाट का आवंटन किया था।
ये है प्रकरण
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण द्वारा 1997-98 में स्वर्ण जयंती नगर योजना के लिए किशनपुर के किसानों से भूमि का अधिग्रहण किया गया था। उस समय भूमि आवंटन की प्रक्रिया जिलाधिकारी के आदेश पर भूमि अध्याप्ति अधिकारी द्वारा पूरी की गई थी। इसी में किसान ओमप्रकाश पक्ष की जमीन का भी अधिग्रहण हुआ। यह जमीन स्वर्ण जयंती नगर फेस टू योजना में पानी की टंकी के आसपास की जमीन है, जहां अब आवासीय कॉलोनी विकसित है। इसी मामले में किसान ओमप्रकाश पक्ष की ओर से यह आरोप लगाते हुए शिकायतें की गई थीं कि उनकी एक बीघा 17 बिस्वा जमीन का अधिग्रहण नियमानुसार हुआ है। शेष 6 बिस्वा जमीन पर बिना किसी प्रक्रिया के एडीए ने कब्जा कर उसमें प्लाट आवंटन कर दिए हैं। इसको लेकर सिविल न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जिस पर 2012 में सिविल न्यायालय ने एडीए के खिलाफ आदेश दिया और इस 6 बिस्वा भूमि का अधिग्रहण गलत करार दिया।
अब ये हुआ आदेश
सिविल न्यायालय के 2012 के इस आदेश के खिलाफ एडीए सचिव ने अपर सत्र न्यायालय में अपील दायर की, जिसमें किसान पक्ष से प्यारेलाल, ओमप्रकाश, मृत मिट्ठन सिंह, मोहिनी देवी, दिनेश कुमार, जय सिंह सभी निवासी किशनपुर आरोपी बनाए, जबकि भूमि पर आवंटन के पश्चात रह रहे गीता देवी, गोपाल कृष्ण, नीरज कुमार, मंजू देवी, डा. राधिका प्रसाद, महेश चंद्र प्रथम पक्ष से शामिल रहे। एडीए की दलील थी कि उन्होंने यह जमीन सीधे अधिग्रहीत नहीं की है। ये जमीन सीलिंग के जरिये उन्हें प्रशासन ने दी है। दूसरा पक्ष गलत मंशा से धन ऐंठने की नीयत से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। नौ साल तक चले इस मामले में 9 नवंबर 2021 को अपर सत्र न्यायालय ने एडीए सचिव की अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें सिविल न्यायालय के आदेश को सही माना गया है।
एडीए में मचा हड़कंप
कहने को एडीए के अधिकारी इस आदेश पर चुप्पी साधे हुए हैं। मगर न्यायालय के इस आदेश के बाद एडीए में हड़कंप मचा हुआ है। किसान को मनाने से लेकर न्यायालय के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट तक जाने की तैयारी चल रही है। इधर, वे लोग भी एडीए पर दबाव बना रहे हैं, जो उस जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं।
एडीए को नहीं आदेश की जानकारी
इस मामले में न्यायालय में पैरोकारी कर रहे एडीए के मुख्य वित्त अधिकारी शिवनाथ सिंह कहते हैं कि वैसे उन्हें न्यायालय के इस तरह के किसी आदेश की अभी तक जानकारी नहीं है। अगर बात विषय की करें तो यह गलत तरीके से अधिग्रहण का नहीं, बल्कि मुआवजे की लड़ाई है। किसान पक्ष ने नए भू अधिग्रहण कानून के अनुसार चार गुना मुआवजे की आवाज उठाई थी, जिस पर सरकार ने कहा कि चूंकि भूमि 2014 से पहले अधिग्रहीत हुई है। इसलिए चार गुना मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इसलिए किसान व एडीए पक्ष सुप्रीम कोर्ट गए। वहां अभी विषय लंबित है। उसके बाद ही मुआवजे पर अंतिम निर्णय होगा।
- गलत तरीके से जमीन अधिग्रहण मामले में सत्र न्यायालय के किसी आदेश की मुझे जानकारी नहीं है। हां, सुप्रीम कोर्ट में मुआवजे को लेकर विषय लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में आगे कोई निर्णय हो पाएगा।
- अर्जुन सिंह, प्रभारी सचिव एडीए