दूध, घी में मिलावट के मामले जुर्माना वसूल होंगे खत्म
ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
एफडीए की ओर से पुराने एक्ट के तहत अदालत में दायर हुए विचाराधीन मामलों को लेकर शासन गंभीर हो गया है। शासन ने पिछले दिनों एफडीए से उस एक्ट के तहत लंबित मामलों का ब्यौरा मांगा है।
शासन की मंशा है कि लंबित मामलों का निस्तारण जुर्माने के आधार पर कर दिया जाए। मावे में घी कम होने या दूध में पानी की मिलावट होने पर केवल जुर्माना वसूला जाएगा। पुराने एक्ट में जुर्माने के साथ सजा का भी प्रावधान था।
डीओ वीपी सिंह और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र द्विवेदी ने बताया पीएफ एए-1954 (प्रिजर्वेशन एंड फूड अल्टरेशन एक्ट-1954) में व्यवस्था थी कि किसी भी तरह की मिलावट पकड़े जाने पर जुर्माने के साथ सजा भी दी जाए। इसलिए अदालत में इस एक्ट के तहत लंबित मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
वर्ष 2011 इस एक्ट को बदल कर नया एक्ट एफ एसएसए-2011 (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट-2011) लागू किया गया था। जिसमें दूध में पानी मिलाने, मावा में घी की मात्रा कम होने जैसे मामलों को छोटा माना गया। इनमें सिर्फ जुर्माने का प्रावधान किया गया, सजा हटा दी गई।
अब शासन ने पुराने एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों को निस्तारित करने की जानकारी मांगी है। अलीगढ़ में ऐसे मामलों की संख्या लगभग 500 तक होने की उम्मीद है, जबकि पूरे प्रदेश में इसकी संख्या हजारों में है। अब ऐसे मुकदमों की सूची बनाई जा रही है। ये मामले केवल जुर्माना वसूलकर खत्म किए जाएंगे।
इससे मुकदमों का बोझ कम होगा तो अदालतों में भी लंबित वादों की संख्या कम होगी। विभागीय अफसर इन मुकदमों की सूची बनाने में जुट गए हैं।