अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायरस संक्रमण से उपचार के लिए 12 मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी से ठीक किया जा चुका है। 2 मरीजों की मृत्यु भी हुई है, लेकिन उनकी उम्र बहुत अधिक थी और उनकी मृत्यु के कारण भी दूसरे हैं। इस तरह प्रतिशत की बात करें तो प्लाज्मा थेरेपी संक्रमण ग्रस्त मरीजों के उपचार में बेहद कारगर साबित हुई है। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि प्लाज्मा थेरेपी प्रत्येक मरीज के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती। मरीज की स्थिति और उपलब्ध प्लाज्मा की स्थिति को देखते हुए निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जेएन मेडिकल कॉलेज से अब तक एक हजार के आसपास कोरोना संक्रमण से ग्रस्त मरीज सही होकर अपने घर जा चुके हैं, लेकिन इसके अनुपात में प्लाज्मा डोनेट करने वालों की संख्या बहुत कम है। मेडिकल कॉलेज में जिन लोगों ने प्लाज्मा डोनेट किया है, उनमें संक्रमण से ग्रस्त होने के बाद ठीक हो चुके डॉक्टर शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायरस संक्रमण से ग्रस्त पहले मरीज को प्लाजमा थेरेपी दी गई थी उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक थी। उन्हें कोरोना के अलावा मल्टी ऑर्गन फेलियर की भी समस्या थी। इसी के कारण उनकी मौत भी हुई थी। उन्हें दीनदयाल हॉस्पिटल से रेफर किया गया था। इसके बाद जो भी मामले मेडिकल कॉलेज में आए हैं उनमें प्लाज्मा थेरेपी सफलता से उपयोग किया गया है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा मेडिकल कॉलेज की माईक्रोबायोलाजी लैब में एक लाख बीस हजार आरटी-पीसीआर परीक्षण किये जा चुके हैं। कोविड-19 रोगियों के लिए एक अलग आइसोलेशन वार्ड बनाया है, जो आपरेशन थिएटर, लेबर रूम और रीनल डायलिसिस की विशेष सुविधाओं से सुसज्जित है।