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यस बैंक के नियम में फंस गई जमा पूंजी, पैसों के लिए मोहताज उपभोक्ता लगाते रहे गुहार

Sat, 07 Mar 2020 12:03 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

- 50-50 लाख रुपये तक की फंस गई रकम
- बैंक के शहर में चार शाखाएं और पांच एटीएम 
- करीब 18.5 हजार खाताधारक हैं यस बैंक के 
- औसतन 150 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित 
- प्रत्येक दिन औसतन होता 200 करोड़ का लेनदेन
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यस बैंक शाखाओं में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रेलवे से रिटायर्ड नरेंद्र कुमार के सामने अजीब संकट खड़ा हो गया है। उन्हें बेटे को इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला दिलाना है। मगर, उनकी जमा पूंजी यस बैंक के नियम में फंस गई है। वे बैंक से पैसे निकालने की गुहार लगा रहे हैं। अपने ही पैसों के मोहताज होकर रह गए हैं।     
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पैसों का यह संकट किसी एक के सामने नहीं बल्कि इस समय बैंक के लगभग 18.5 हजार खाताधारकों के सामने खड़ा हो गया है। बैंक में सिर्फ 50 हजार रुपये निकासी के नियम ने लोगों को बेचैन करके रख दिया है। लोगों की 50-50 लाख रुपये तक की रकम फंसकर रह गई है। न भुगतान कर पा रहे हैं और न पैसे मंगवा पा रहे हैं। 

शुक्रवार को एटीएम और शाखाओं में लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। भीड़ इतनी कि बैंककर्मियों के हाथ-पांव फूल रहे थे। संजय प्लेस स्थित शाखा में तीन काउंटर बनाए गए थे, सभी पर बड़ी संख्या में भीड़ लगी हुई थी। इसमें युवा, महिलाएं, बुजुर्ग शामिल थे। कई का तो भीड़ देखकर ही हौंसला जवाब दे गया। वे इसे देखकर ही उल्टे पांव लौट गए। परेशान लोग नियम को कोसते दिखे। एटीएम पर भी ग्राहकों का आवागमन बना रहा। 
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अजीब बात है। हम अपने पैसे ही नहीं निकाल पा रहे हैं। क्या इसलिए हम बैंकों में पैसा रखते हैं। जिससे हमें बुरी तरह परेशान होना पड़े। बच्चे को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने के लिए पैसों की जरूरत है।  नरेंद्र कुमार

मेरा यस बैंक में खाता है। घर के सभी जरूरी खर्च इसी खाते से चलते हैं। इसमें बच्चों की पढ़ाई, इलाज आदि शामिल है। इस नियम ने सोच में डाल दिया है कि आगे कैसे खर्च चलेगा।  मिली मोहन , गृहणी

मुझे अशोक लीलेंड कंपनी को 18 लाख रुपये का पेमेंट करना था। मगर, नियम में बंधने के कारण भुगतान नहीं कर पाया। इसके चलते साख पर बट्टा तो लगा ही साथ ही चालू और बचत खातों में जमा करीब 50 लाख रुपया भी फंस गया है।  प्रशांत लवानिया, कारोबारी

नकद की सख्त जरूरत थी। इसे लेने यस बैंक की ब्रांच गए थे, लेकिन लंबी कतार लगी हुई थी। इसके चलते लौटना पड़ा। यही हाल बना रहा, तो संकट पैदा हो सकता है। संजीव जैन, रेस्टोरेंट मालिक
 
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