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नवरात्र विशेष: आगरा में 'शक्ति स्वरूपा' महिलाओं ने अंगदान कर बचाई अपनों की जिंदगी, पढ़ें इनकी कहानी

Thu, 07 Oct 2021 12:58 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

आगरा में जीवनरक्षक अंग दान करने में महिलाएं आगे हैं। बीते पांच साल में जीवन रक्षक अंगों के दान के छह मामले हैं। इनमें चार में महिलाओं ने अपने अंगदान 'अपनों' की जान बचाई है।  
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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गुरुवार से नवरात्र शुरू हो चुके हैं। संकट टालने के लिए श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष आराधना करेंगे। असल जिंदगी में मां-बहन, पत्नी ऐसी ही शक्ति स्वरूपा हैं जो बेटे, भाई और पति की जिंदगी पर मुसीबत आने पर सबसे आगे खड़ी दिखतीं। आगरा में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने जीवन रक्षक अंग दानकर अपनों की जान बचाई है। 

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आगरा में पांच साल में जीवन रक्षक अंगों के दान के छह मामले हैं। इसमें से पांच को किडनी और एक मरीज को लिवर दान में मिला है। जीवनरक्षक अंगों के दान में महिलाएं आगे हैं। इन छह मामलों में चार महिलाओं और दो पुरुषों ने अंगदान किए हैं। 

अंग प्राप्त करने वालों में यह पुरुषों से पीछे हैं। एक ही महिला रही जिसको पुरुष ने अंगदान किया। बाकी के पांच मामलों में पुरुष ही अंग पाने वाले रहे। इनके आपसी रिश्तों की बात करें तो चार मामलों में मां ने बेटे, एक मामले में बहन ने भाई और एक में पत्नी ने पति को किडनी-लिवर देकर जिंदगी बचाई।

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कोरोना महामारी में जीवनरक्षक अंगदान नहीं हो पाया 
कोरोना महामारी के चलते बीते 16 महीने से जीवन रक्षक अंगों का दान नहीं हो पाया है। इस साल स्वास्थ्य विभाग के यहां दो मामले आए हैं, इनका सत्यापन किया जा रहा है। अंगदान करने वाली महिलाएं हैं और अंग पाने वाले पुरुष हैं। मां अपनी संतान को किडनी देंगी। 

जटिल है अंगदान प्रक्रिया
किडनी, लिवर, फेफड़े जैसे जीवनरक्षक अंगों के दान के लिए शपथ पत्र सीएमओ कार्यालय में जमा होता है। इसकी प्रशासनिक अधिकारी जांच करते हैं कि जबरन या फिर खरीद-फरोख्त का मामला तो नहीं। 

रिपोर्ट मिलने पर सीएमओ के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी दोनों परिवारों के साथ बैठक कर सहमति लेते हैं, वीडियो रिकॉर्डिंग भी होती है। सभी कुछ ठीक होने पर सीएमओ संबंधित अस्पताल को पत्र लिखकर अंगदान कराने की अनुमति देते हैं। 
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'मां ने दी किडनी'
किरावली में 32 साल का युवक दिल्ली में जॉब करता था, परेशानी होने पर डॉक्टर को दिखाया तो इनकी दोनों किडनी खराब बताई। ऐसे में इनकी मां किडनी देने के लिए सबसे आगे आईं। चिकित्सकीय जांच के बाद मां ने अपने बेटे को किडनी दान की। 

'बेटे की जान बचाने को आगे आई मां'
कमला नगर क्षेत्र के रहने वाले 29 साल के युवक की दोनों किडनी खराब होने पर जान पर बन आई। यहां भी मां सबसे आगे रही। बेटे की जिंदगी बचाने के लिए एक किडनी दी। पिता ने किडनी देने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं मानी।

'अंगदान में महिलाएं हैं आगे'
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जीवनरक्षक अंगों के दान में महिलाएं ही सबसे पहले आगे आती हैं। इसकी एक वजह पति या फिर अन्य पुरुष व्यक्ति का कामकाजी होना भी है। उस पर परिवार की जिम्मेदारी होती है। मानवीय पहलू के तौर पर भी महिलाएं ही अंगदान में आगे हैं।

अन्य सदस्यों को रोकती हैं महिलाएं
अध्यक्ष आईएमए डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा क पति, बेटे या फिर भाई की जान पर आए और किडनी-लिवर देकर जान बच सकती है तो ऐसे मामलों में महिलाएं सबसे आगे हैं। घर के पुरुष सदस्य अंगदान करना भी चाहें तो उन्हें रोकती हैं। विशेष परिस्थिति में ही महिलाएं पुरुषों को जीवनरक्षक अंगदान करने देती हैं।
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