मैनपुरी निवासी कुलदीप की पत्नी पूनम की गंभीर हालत होने के बावजूद एंबुलेंस चालक उसे अस्पताल ले जाने के जगह तीन घंटे तक आगरा की सड़कों पर घुमाता रहा। इस कारण पूनम की मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस को बुला लिया।
तहरीर न मिलने का बहाना बनाकर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। परिजनों ने उससे पूनम को सैफई मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए कहा था। आरोप है कि चालक पूनम को उस अस्पताल में ले जाना चाहता था, जहां उसे कमीशन मिल सके।
ये भी पढ़ें- डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालयः बीए तृतीय वर्ष की हिंदी साहित्य की परीक्षा निरस्त, ये है वजह
पूनम को पांच दिन पहले डिलीवरी के लिए आगरा के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन पहले पूनम ने एक बच्चे को जन्म दिया था लेकिन जन्म के बाद ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद पूनम की तबीयत भी बिगड़ने लगी।
तीन घंटे तक सड़कों पर दौड़ता रहा एंबुलेंस
बुधवार को सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टरों ने सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया। परिजनों ने एक एंबुलेंस किराए पर ली। दोपहर में महिला को एंबुलेंस से सैफई ले जाने के लिए निकले लेकिन एंबुलेंस चालक सैफई जाने के बजाय आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर घुमाता हुआ वापस आगरा ले गया।
कुलदीप ने बताया कि चालक तीन घंटे तक सड़क पर एंबुलेंस दौड़ाता रहा। वह जब एमजी रोड पर पहुंचा तब उससे पूछा कि वह सैफई क्यों नहीं गया। इस बीच पूनम की तबीयत बिगड़ने लगी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। एंबुलेंस चालक शव को एंबुलेंस से उतारने लगा। यह देख कुलदीप ने यूपी 112 पर फोन कर दिया।
पुलिस आने पर चालक को लोहामंडी थाना ले गई। कुलदीप ने पुलिस से कहा कि आगरा में डग्गेमार एंबुलेंस वालों का गिरोह सक्रिय है जो अस्पताल संचालकों से कमीशन लेकर मरीज ले जाता है। यह उसी गिरोह का सदस्य लगता है। यह कहकर कुलदीप चला गया।
दूसरी एंबुलेंस में ले गया शव
कुलदीप का रो रोकर बुरा हाल था। उसने लोहामंडी थाना में पुलिस की मदद से दूसरी एंबुलेंस मंगाई। इसमें पत्नी का शव लेकर मैनपुरी के लिए रवाना हो गया।
तहरीर नहीं मिली, इसलिए केस दर्ज नहीं किया
लोहामंडी थाना के प्रभारी संजीव त्यागी का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। महिला केपरिजनों ने तहरीर नहीं दी, इसलिए इस मामले में कार्रवाई नहीं हो सकी। अगर परिजन तहरीर देते हैं तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा।