नया वाहन खरीद रहे हैं, तो उसका वारिस तय होने के बाद भी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) पर लिखा नहीं मिल पा रहा है। आरटीओ कर्मियों और वाहन डीलर्स की मनमानी वाहन नॉमिनी के शासनादेश पर भारी पड़ रही है।
आरटीओ में पिछले तीन माह से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) पर नॉमिनी का नाम डालना बंद कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने तीन साल पहले ही वाहन की आरसी पर नाॅमिनी का नाम दर्ज करने का आदेश जारी किया था। इससे वाहन स्वामी की मृत्यु के बाद वाहन संबंधी विवाद दूर हो सकते हैं।
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प्रदेश सरकार की अधिसूचना के मुताबिक नया वाहन खरीदने के साथ नॉमिनी तय करना है। वाहन स्वामी अपने माता-पिता या पत्नी को नॉमिनी बना सकता है। इसके लिए आरसी में नॉमिनी का नाम अंकित होने लगा। पिछले कुछ माह से इस प्रक्रिया को बंद कर दिया गया है। संभागीय परिवहन विभाग में वाहन संबंधी कई विवादित मामले आते है, जिसमें स्वामी की मृत्यु के बाद वाहन के कई दावेदार सामने आ जाते थे। ऐसे में आरटीओ अधिकारियों को वाहन ट्रांसफर करने में मुश्किल आती थी। वाहन किसके नाम किया जाए, इसका निर्णय लेने में लंबा समय लग जाता था। इसी के मद्देनजर शासन के स्तर से नॉमिनी बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अब इस नियम को आरटीओ कर्मचारी और वाहन डीलर्स नहीं मान रहे है।
दयालबाग निवासी दिनेश शर्मा ने एक माह पहले नया चार पहिया वाहन खरीदा है। उन्होंने बताया कि पत्नी का नाम वाहन नॉमिनी के रूप में डीलर को लिखवाया था लेकिन आरसी में नाम दर्ज नहीं हुआ। वाहन डीलर के कर्मचारियों का कहना है कि नॉमिनी के नाम की स्पेलिंग गलत होने पर सुधार कराने में मुश्किल होती है। इस वजह से नाम नहीं आता है।
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राजपुर चुंगी निवासी मनीष कुमार के नए वाहन की आरसी पर नॉमिनी का नाम नहीं आया। उन्होंने आरटीओ कार्यालय से संपर्क किया तो बताया गया कि डीलर की ओर से नाम दर्ज नहीं किया गया। अब नॉमिनी का नाम न होने से भविष्य में दिक्कत खड़ी होगी। शासन ने नॉमिनी का नाम लिखना अनिवार्य किया हुआ है। एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार का कहना है कि आरसी पर नॉमिनी का नाम होना चाहिए। बिना नॉमिनी के आरसी जारी हो रही है, तो इस मामले को दिखवाया जाएगा। सभी वाहन डीलर को चेतावनी पत्र भी जारी किया जाएगा।