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कब सहेजे जाएंगे काकोरी के नायक बिस्मिल की कर्मभूमि के खंडहर

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कब सहेजे जायेगें काकोरी के नायक रामप्रसाद बिस्मिल की कर्म भूमि के खंडहर, काकोरी में सरकारी खजाना - फोटो : Agra Dehat
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बाह। अमृत महोत्सव में सोमवार को सरकार ने काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ मनाई। बाह के जोधापुरा गांव में काकोरी के नायक रामप्रसाद बिस्मिल की कर्मभूमि खंडहर में तब्दील हो गई है। चंबल के बीहड़ में बचे अवशेष स्मृतियों को सहेजने के लिए सरकार का मुंह ताक रहे है। यहां के लोग चाहते हैं कि सरकार स्मृतियों का संरक्षण कराए।
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मुरैना के रूअर बरबाई गांव के मुुरलीधर के पुत्र राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 18 जून 1897 में शाहजहांपुर में हुआ था। उन्होंने बचपन में अपनी ननिहाल जोधापुरा के चंबल के बीहड़ में मैनपुरी षडयंत्र केस के हीरो गेंदालाल दीक्षित के सानिध्य में क्रांति को धार दी। 9 अगस्त 1925 में काकोरी रेलवे स्टेशन पर सरकारी खजाना लूटकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी।
इस मामले में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला, राजेंद्र लहरी, रोशन सिंह, आगरा के चंद्रधर जौहरी, चंद्रभाल, एटा के बाबूराम वर्मा, मथुरा के शिव चरन लाल शर्मा समेत 40 क्रांतिकारी गिरफ्तार किए गए थे। राम प्रसाद बिस्मिल का रूअर बरबाई गांव में कच्चा मकान भी जीर्ण-शीर्ण पड़ा है।
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बिस्मिल के भतीजे बिजेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने परिवार की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। कर्मभूमि जोधापुरा में खंडहर पड़ा है। स्मृति स्थल भी बनवाने की पहल नहीं हुई है। पूर्व सैनिक सेवा संगठन भदावर के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह भदौरिया, देवेंद्र सिंह चौहान, पुरुषोत्तम सिंह, सुरेंद्र सिंह,राजेंद्र सिंह, राजवीर सिंह आदि ने जोधापुरा में स्मृति स्थल बनाए जाने की मांग सरकार से की है।
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