योजना के अनुसार, नई नीति के तहत प्रत्येक एक करोड़ रुपये के निवेश से 20 रोजगार का सृजन करना है। इसके माध्यम से स्टैंडअलोन फुटवियर व लेदर उत्पाद निर्माण इकाई, फुटवियर व लेदर मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और मेगा एंकर यूनिट को 50 से 150 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित किया जा सकेगा। क्लस्टर के लिए कम से कम 200 करोड़ और एलाइड फुटवियर व लेदर यूनिट से संबंधित संयंत्र, निर्माण इकाई व प्राइवेट पार्क के विकास के लिए कम से कम 150 करोड़ रुपये निवेश करना होगा। प्रत्येक इकाई से 1000 से 3000 रोजगार के अवसर सृजित हो सकेंगे।
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निर्माण और संचालन का कार्य 5 वर्षों में करना होगा पूरा
प्रदेश के अतिरिक्त देश में सिर्फ तमिलनाडु ऐसा राज्य है जिसकी खुद की फुटवियर व लेदर प्रोडक्ट्स पॉलिसी है। ऐसे में, पॉलिसी के अंतर्गत प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना 25 से 100 एकड़ में करने वाले डेवलपर्स को अधिकतम 45 करोड़ रुपये तक पूंजीगत सब्सिडी के तौर पर मिल सकेगी। भूमि क्रय में 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी में छूट मिलेगी। इसके निर्माण व संचालन का कार्य 5 वर्षों में पूरा करना होगा। बड़े प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में होगी। अधिकतम पूंजीगत सब्सिडी 80 करोड़ रुपये तक मिलेगी। इसके निर्माण और संचालन का कार्य भी 5 वर्षों में पूरा करना होगा।
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