तीर्थनगरी वृंदावन में 12 वर्ष के बाद होने वाला मिनी कुंभ मेला 2020 में नहीं बल्कि 2021 में होगा। मिनी कुंभ को लेकर सोमवार को सिंहपौर मंदिर में संत महंतों ने बुलाई एक बैठक में इसका ऐलान किया। संतों ने कहा कि यदि मर्यादा के विपरीत शासन, प्रशासन या अन्य कोई पंथ इसमें अनाधिकार चेष्टा करेगा तो वैष्णव साधु समाज उसका पुरजोर विरोध करेगा।
बैठक में अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के ब्रज प्रदेश अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास ने कहा कि वृंदावन में मिनी कुंभ मेला (बैठक) का आयोजन 2021 में वसंत पंचमी से रंगभरी एकादशी तिथि तक किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संन्यासी संतों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर वृंदावन मिनी कुंभ में अपनी जगह सुरक्षित कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि सर्वथा अनुचित है।
महंत लाड़िलीशरण महाराज ने कहा कि मिनी कुंभ मेले के आरंभ काल से ही इसमें वैष्णव अखाड़ों और खालसा धारियों, महामंडलेश्वरों, श्रीमहंतों के द्वारा ही भागीदारी और पर्व स्नान भी संपादित होते रहे हैं। अन्य किसी संप्रदाय और पंथ की कोई भागीदारी कभी नहीं रही है और न ही भविष्य में होनी चाहिए।
बताया गया कि वृंदावन में मिनी कुंभ को मिनी कुंभ बैठक का नाम दिया जाता है। बैठक में महंत रामस्वरुप दास ब्रह्मचारी, महंत फूलडोल बिहारी दास, महंत सच्चिदानंद, महंत विश्वम्भर दास, महंत हरिशंकर दास, महंत मदनमोहन दास, महंत ब्रजबिहारी दास, महंत गोपीदास, महंत सुखदेव दास, महंत प्रेमदास, महंत नारायण दास आदि उपस्थित थे।