कार्यक्रम के प्रवक्ता शंकर देव तिवारी ने बताया कि बाह के लोग क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित के बलिदान के सौ वर्ष पूरे होने पर 21 दिसंबर को सामूहिक उपवास करेंगे। इसी दिन उनकी जन्मस्थली पर चबूतरा निर्माण के बाद शिलालेख लगाया जाएगा।
कॉकोरी के नायक बिस्मिल की भूले कर्मस्थली
19 दिसंबर 1927 को फांसी के फंदे पर झूले कॉकोरी के नायक राम प्रसाद बिस्मिल ने चंबल के बीहड में क्रांति की ज्वाला जलाई थी। बाह के जोधपुरा गांव के बीहड के खंडहरों में उनकी यादों का इतिहास झांक रहा है। बिस्मिल का बचपन ननिहाल जोधपुरा में ही बीता था।
यहीं से मैनपुरी षडयंत्र केस के हीरो रहे मई गांव के गेंदालाल दीक्षित के संपर्क में आए बिस्मिल क्रांति धारा से जुडे़। पूर्वसैनिक सेवा संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष जितेंद्र सिंह भदौरिया ने केंद्र और प्रदेश सरकार से यहां उनका स्मारक बनाए जाने की मांग की है।