मैनपुरी जिले में पुलिस द्वारा बरामद चोरी के वाहनों का समय रहते निस्तारण न किए जाने से थानों में लाखों के वाहन कबाड़ में बदलते जा रहे हैं। शहर से लेकर देहात तक थानों में वाहनों के अंबार लगे हुए हैं। अधिकारियों की मानें तो जटिल कानूनी प्रक्रिया के चलते निस्तारण में समय लगता है। लावारिस वाहनों की नीलामी के लिए जिला स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
शहर कोतवाली की बात करें या जिले के सभी 13 थानों की। यहां पुलिसकर्मियों के लिए जितने आवास नहीं हैं। उससे कई गुना वाहन परिसर में खड़े हुए हैं। शहर कोतवाली में बाहर और मेस के सामने वाहनों के ढेर लगे हुए हैं। सर्दी का मौसम हो या गर्मी, हर मौसम में यह वाहन यहां खड़े जंग खाते रहते हैं। शायद ही एकाध वाहन स्वामी का पता चलता हो।
शहर की बात करें तो कोतवाली में बीते करीब पांच सालों से कबाड़ वाहनों की नीलामी प्रक्रिया नहीं हुई है। इसके चलते सीओ कार्यालय और पुलिस लाइन भी इन वाहनों को खड़ा करने का ठिकाना बन चुके हैं। भोगांव, करहल, किशनी, औंछा, बरनाहल, कुरावली आदि थानों का भी यही हाल है।
क्यों नहीं हो पाता निस्तारण
पुलिस द्वारा बरामद किए गए अधिकांश वाहन चोरी के मामलों से संबंधित होते हैं। चोरी होने के बाद वाहन स्वामी की ओर से रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है। इसके बाद बरामदगी न होने पर पुलिस एफआर लगा देती है। वाहन स्वामी को बीमा कंपनी से भुगतान मिल जाता है। इसके चलते थानों में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जाती है।
कई वाहनों के मुकदमे न्यायालय में चल रहे हैं। ऐसे में कोर्ट के आदेश पर ही निस्तारण की कार्रवाई होती है। इसके अलावा लावारिस वाहनों को डीएम की अनुमति पर समिति बनाकर नीलाम कराए जाने की प्रक्रिया अमल में लाई जाती है।
- मधुवन कुमार सिंह, एएसपी।