फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीहड़ में फिर सक्रिय हुए कछुआ तस्कर, मलेशिया और चीन से जुड़े हैं तस्करी के तार

Thu, 31 Oct 2019 04:15 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
तस्करों के पास से बरामद कछुआ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बीहड़ में बहने वाली चंबल नदी के आसपास कछुआ तस्कर गिरोह फिर से सक्रिय हो गए हैं। वन विभाग की टीम को इसकी जानकारी मिली है। इसकी सूचना पर पुलिस ने सात दिन में दो गिरोह तो पकड़ लिए हैं लेकिन अब भी कई बचे हुए हैं। इनकी तलाश की जा रही है।
विज्ञापन


ये तस्कर यहां से दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को ले जाकर दिल्ली और कोलकाता में बेच देते हैं। चार दिन पहले ही पुलिस ने फतेहाबाद के अजय, मंसूखपुरा का सूरज, और फिरोजाबाद के लल्ला को गिरफ्तार कर इनसे 80 कछुए बरामद किए। इनसे पूछताछ में पता चला कि  चंबल में और भी गिरोह सक्रिय हैं।

कैंट स्टेशन से पकड़ा गया गिरोह

इसके बाद कैंट स्टेशन से एक और गिरोह पकड़ा गया। उससे तीन कछुए बरामद हुए। दिवाली से पहले वन विभाग की चौकी ने भी यही सूचना दी थी कि कछुआ तस्कर तेजी से सक्रिय हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया था। 
विज्ञापन

इन गिरोह में कुछ स्थानीय लोग हैं जिन्हें कछुआ पकड़कर लाने का काम दिया गया है। इनसे कछुए लेकर दूसरा गिरोह दिल्ली या कोलकाता जाता है। वहां से तीसरा गिरोह विदेश में भेजता है।

एसपी पूर्वी प्रमोद कुमार ने बताया कि जेल भेजे गए गिरोह से जितने लोग जुड़े हैं,उनकी भी तलाश की जा रही है। जरूरत पड़ी तो वन विभाग के साथ संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा।

इन प्रजातियों के कछुए हैं यहां

चंबल नदी में मोरपंखी, साल, सुंदरी, कटहेवा, पचेड़ा, तिलकधारी, धमोक और चौड़ प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। इनमें तिलकधारी बेहद दुर्लभ है। इनकी गर्दन और आंखों के पास लाल रंग की धारी होती है।
विज्ञापन

विदेश में भेजे जाते हैं कछुए

22 मार्च 2017 को एसटीएफ ने कछुआ तस्कर अजय और दीपेंद्र को गिरफ्तार किया था। इनसे दुर्लभ प्रजाति के 23 कछुए मिले थे। दोनों से पूछताछ में पता चला था कि चंबल के कछुओं को दिल्ली और कोलकाता भेजा जाता है। 

वहां से सिंगापुर, मलेशिया और चीन ले जाकर बेचा जाता है। तिलकधारी कछुए वास्तु के अनुसार शुभ माने जाते हैं, इसलिए इनकी मांग ज्यादा है। तंत्र मंत्र और दवाओं के लिए भी कछुओं की तस्करी की जाती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें