उन्होंने कहा कि राष्ट्रवीरों के प्रति सम्मान का भाव ही भारत की ताकत है। हम इस सपूत राष्ट्रनायक दुर्गादास को ऐसे समय में याद कर रहे हैं जब देश काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी मना रहा है। 1925 में क्रांतिकारियों ने आजादी की लड़ाई में विदेशी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं।
सीएम योगी ने औरंगजेब को दुष्ट बताते हुए कहा कि शिवाजी ने उसे चुनौती दी। चूहे की तरह औरंगजेब तड़पता रह गया। जोधपुर पर कब्जा नहीं कर सका। दुर्गादास जोधपुर नरेश के सेनापति थे। दुर्गादास ने स्वदेश और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी। 81 वर्ष की आयु में सन्यास लेकर वह उज्जैन चले गए। जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बृज भूमि के कण-कण में कृष्ण कन्हैया का वास है। कला, विश्वास, आस्था, समर्पण, संस्कृति राष्ट्र निष्ठा में बदलनी चाहिए। बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने राठौर समाज का अभिनंदन किया। फिर कहा कि मुझे 13 अगस्त को प्रतिमा अनावरण के लिए आना था, लेकिन हर घर तिरंगा अभियान के कारण नहीं आ सका।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दस वर्ष से इस मूर्ति को मेरा ही इंतजार था। मुझे भी समय ऐसे दिन मिला जब कृष्ण जन्माष्टमी है। इस दौरान मंच पर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर, उच्च शिक्षा मंत्री योंगेंद्र उपाध्याय, राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति, डॉ. जीएस धर्मेश व अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।