आगरा: गोदाम से भारी मात्रा में एक्सपायर दवाएं बरामद
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किलो के हिसाब से खरीदते थे एक्सपायर हो चुकी दवाइयां
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन ने बताया कि एक्सपायर हो चुकी दवाइयों को किलो के हिसाब से खरीदा जाता था। फर्म में तौल मशीन भी मिली है। यहां टेबलेट और कैप्सूल को नए रैपर में पैक किया जाता था। एक्सपायर हो चुकी दवाइयां बेहद कम दाम पर मिल जाती थीं। इन्हें दवाइयों के असली मूल्य पर बेचा जाता था।
गोदाम में पूरा गिरोह कर रहा था काम
गोदाम में दवाइयों का भंडारण किया गया था लेकिन इसका कोई लाइसेंस नहीं था। यहां पूरा गिरोह काम कर रहा था। हर सदस्य को अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कोई पैकिंग करता था तो कोई मोहर लगाता था। कोई ऑर्डर लाता था तो कोई कच्चा माल खरीदता था। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सभी को आरोपी बनाया जाएगा।
अरोड़ा बंधुओं से चली जांच राजौरा बंधुओं तक पहुंची
करीब छह महीने पहले पंजाब पुलिस ने नशे की दवाइयों की तस्करी करने वाले आगरा गैंग का खुलासा किया था। इसे कमला नगर निवासी अरोड़ा बंधू चला रहे थे। इस गिरोह की जांच आगे बढ़ते हुए राजौरा बंधुओं तक पहुंच गई है। साथ ही खुलासा हुआ है कि दवाइयों की तस्करी और नकली दवाइयां बनाने में सिर्फ आगरा गैंग ही नहीं लगा है।
अब राजौरा गैंग सामने आया है। इससे पहले पंकज गुप्ता गिरोह, जयपुरिया गिरोह का खुलासा हो चुका है। इसके बाद और भी गिरोह का खुलासा हो सकता है। औषधि निरीक्षकों ने बताया कि आगरा गैंग की जांच के दौरान ही राजौरा बंधुओं की फर्म की जानकारी मिली। इसका रिकॉर्ड देखा गया तो मामला बड़ा लगा। जांच के दौरान पता चला कि फर्म का असली काम एक्सपायर दवाइयों को फिर से पैक करके बेचने का है।
चार मंडलों के आठ औषधि निरीक्षकों ने मारा छापा
एक्सपायर दवाइयों को दोबारा पैकिंग करके बेचे जाने का पता चलने पर औषधि विभाग ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। वहां से निर्देश का इंतजार था। सोमवार सुबह कार्रवाई के लिए निर्देश मिले। इसकी तैयारी पहले से चल रही थी। आगरा, अलीगढ़, मेरठ और मुरादाबाद मंडल के आठ औषधि निरीक्षक छापे में लगे। सबसे पहले आगरा में सत्यम प्लाजा में छापा लगा। इसके बाद राजौरा बंधुओं के आवास पर। फिर दवाओं की अन्य फर्मों पर टीमें पहुंच गई।