नगर आयुक्त और महापौर ने मामले को शांत कराते हुए दोनों पक्षों में समझौता करा दिया और झगड़ रहे दोनों पार्षदों ने कहा कि भविष्य में सदन में इस तरह की हरकत नहीं करेंगे। उधर, महापौर और नगर आयुक्त ने बताया कि सदन में बहस जरूर हुई थी, कोई कुर्सी नहीं फेंकी गई। दोनों पक्षों को शांत कराकर गले मिलवा दिया गया।
20 लाख रुपये लेने का है विवाद
दरअसल, पिछले सदन की बैठक में पार्षदों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया था कि एक जमीन के मामले में महापौर ने 20 लाख रुपये लिए हैं। उस वक्त जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी जांच कर रही थी कि इसी बीच महापौर ने कमेटी भंग कर दी। इस बात पर शुक्रवार को दोनों पार्षदों में बहस हुई।
एक पार्षद ने कहा कि क्या कमेटी भंग करने के लिए ही बनाई गई थी। तय हुआ था कि कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट सदन में रखेगी। लेकिन इससे पहले ही भंग कर दी गई। कहीं न कहीं आरोप में सच्चाई थी, इसीलिए महापौर ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर कमेटी भंग की। दूसरे पार्षद महापौर के निर्णय का पक्ष लेने लगे, तभी विवाद हो गया। मालूम कि इससे पहले पार्षदों में चप्पलें भी चल चुकी हैं।