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Agra: विवि की गलतियों की सजा भुगत रहे हजारों छात्र, मिला एफ ग्रेड... तो किसी को अंकों का इंतजार

Mon, 10 Jun 2024 10:33 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि की गलतियों की सजा हजारों छात्र भुगत रहे हैं। किसी को एफ ग्रेड मिला तो किसी को अंकों का इंतजार है। आए दिन छात्र-छात्राओं की भीड़ अंक तालिकाओं में संशोधन के लिए प्रदर्शन करती नजर आती है। 
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में एमए हिंदी की छात्रा दामिनी के प्रथम वर्ष में चारों पेपर में बी प्लस ग्रेड मिली थी। लेकिन एमए द्वितीय के रिजल्ट में न केवल उसे अनुपस्थित दिखा दिया गया। बल्कि दो पेपर में एफ, 2 पेपर में सी, 1 में एबी और एक में ए प्लस मिला। नतीजा पहले साल में प्रथम श्रेणी से पास होने वाली छात्रा फेल हो गई। पिछले एक साल से चक्कर काटने के बावजूद उसकी अंक तालिकाओं में आवश्यक संशोधन नहीं हो सका है।

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इसी प्रकार छात्रा कंचन को एमए प्रथम वर्ष में चार में से तीन पेपर में फेल दिखा दिया गया जबकि चौथे पेपर का स्थान खाली था। विवि के चक्कर काटने के बाद उसके एक पेपर में बी व तीन में सी ग्रेड दे दी गई। ये दो तो मात्र उदाहरण हैं। डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि में प्रवेश, परीक्षा और परिणाम में तमाम गड़बड़ियां सामने आती रहती हैं। छात्र नेता आशीष प्रिंस बताते हैं कि अपनी समस्या के निदान के लिए विवि आने वाले छात्रों को विवि कर्मी एक पटल से दूसरे पटल पर घूमाते रहते हैं।

आए दिन विवि में छात्र-छात्राओं की भीड़ अंक तालिकाओं में संशोधन के लिए प्रदर्शन करती नजर आती है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। एनएसयूआई आगरा कॉलेज के अध्यक्ष अनिल सूर्यवंशी बताते हैं कि अकेले आगरा कॉलेज के ही 200 से ज्यादा छात्र-छात्राओं को फेल कर दिया गया है। कॉलेज से लेकर विवि तक प्रदर्शन किया। हर बार कोरा आश्वासन मिला, अब तक छात्रों को राहत नहीं मिल सकी है।
 

ओएमआर पर परीक्षा में ज्यादा नकल

डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि की परीक्षाओं में जमकर नकल कराई जा रही है। ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) पर आधारित परीक्षा में नकल के लिए बदनाम कॉलेजों में प्रति छात्र डेढ़ से 2000 रुपये वसूली की जा रही है। छात्रों को बोलकर उत्तर बता दिए जाते हैं, जिससे किसी प्रकार के साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं।
 

28 मई से शुरू हुई परीक्षा में पहली सामूहिक नकल 29 मई को पकड़ी गई। इसके बाद 3 जून को एक बार फिर से छह महाविद्यालयों में नकल की सूचना पर विवि प्रशासन ने पर्यवेक्षक नियुक्त किए। इन्हीं छह कॉलेजों में से एक में शनिवार को सेटिंग के खेल का वीडियो वायरल हुआ। इस पर कुलपति प्रो. आशु रानी ने जांच समिति गठित कर तत्काल पर्यवेक्षक और केंद्र अध्यक्ष बैठाकर परीक्षआ कराने के निर्देश दिए।
 

आठ जून को ही श्री राधे जमुना देवी महाविद्यालय कलाल खेड़िया की रिपोर्ट सचल दल ने विवि प्रशासन को दी जिसके बाद श्री राधे जमुना देवी की परीक्षा केंद्र को निरस्त कर बीडीके महाविद्यालय में डाला गया है। बावजूद इसके नकल के खेल पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
 

गड़बड़ी तो होगी ही

विवि ने परीक्षा संबंधी किसी कार्य में परीक्षा समिति की सहमति नहीं ली। न केंद्र बनाने में और न ही पर्यवेक्षक नियुक्त करने में समिति से सलाह ली गई। बगैर जांच के ही केंद्र और पर्यवेक्षक बनाए गए। ऐसे में गड़बड़ी तो होगी ही। - डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, अध्यक्ष औटा
 

बोलकर करा रहे नकल

अधिकांश परीक्षा केंद्र सीसीटीवी से तो जुड़े हैं, लेकिन अधिकांश के माइक काम नहीं कर रहे। बोल-बोलकर बहुविकल्पीय उत्तरों के टिक लगवाने में 5 मिनट का भी समय नहीं लगता। इसलिए नकल हो रही है। - डॉ. संजय मिश्रा, महामंत्री औटा
 
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अंक तालिकाओं में करा रहे सुधार

परीक्षा की शुचिता के लिए ही सारी कवायद की जा रही है। छात्रों की अंक तालिकाओं में भी सुधार किया जा रहा है। - ओम प्रकाश, परीक्षा नियंत्रक
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