कासगंज। रविवार को बदायूं जिले की सीमा में गंगा नदी की जमीन पर कब्जे को लेकर हुआ विवाद कोई नया नहीं है। पहले भी यहां गैंगवार होता रहा है। यहां तक कि जाने भी जाती रहीं हैं। पतित पावनी मां गंगा का जो जल जीवन देने वाला है उसके किनारे समय-समय पर खून की नदियां भी वही हैं। बरसात खत्म होते ही इस जमीन पर जोताई से लेकर फसल कटाई तक यहां गैंगवार होते रहे हैं। कासगंज जिले के चंदवा और उझानी क्षेत्र के किसानों का गैंगवार पुराने जख्म ताजा कर रहा है। उझानी पुलिस ने चंदवा क्षेत्र के 37 किसानों को गिरफ्तार किया है।
केस 1
वर्ष 2014 के फरवरी माह में गोले ठाकुर और मल्लाहों के बीच गैंगवार हुआ था। उस समय यहां दो की जान गई थी। तब प्रशासन सीमांकन के बाद निशानदेही नहीं कर सका। दोनों पक्षों पर ही पुलिसिया कार्रवाई हुई।
केस 2
वर्ष 2018 के दिसंबर माह में सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव किलोनी और किसौल के ग्रामीण आमने सामने आए थे। यहां कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसी थीं। जिसमें 5 लोगों की जानें गईं। इस घटना के बाद प्रशासन ने गंगा नदी की जमीन का चिन्हांकन और निशानदेही की।
केस 3
सोरों के गांव घूरनपुर में कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर वर्ष 2019 में दो पक्ष आमने सामने आए थे। दोनों ओर से गोलियां चली। हालांकि पुलिस की सतर्कता के चलते किसी की जान नहीं गई, लेकिन पुलिस ने उस समय 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।