मैनपुरी। आजादी के आंदोलन में मैनपुरी में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों द्वारा बनाई योजना इतिहास के पन्नों में दर्ज है। मिशन स्कूल और बोर्डिंग हाउस में हुई बैठक में बनाए गए विद्रोह क ी योजना का खुलासा होने पर पकड़े गए क्रांतिकारियों को जेल में यातनाएं भुगतनी पड़ीं, लेकिन जिले के क्रांतिवीर अपने इरादों से नहीं डिगे।
घटनाक्रम पर नजर डालें तो आजादी के आंदोलन के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के खिलाफ लोगों में विद्रोह के स्वर तेज होने लगे। क्रांतिकारियों ने मैनपुरी के मिशन स्कूल में बैठक की। क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित के नेतृत्व में 1914 में वाराणसी में विस्फोट की योजना बनाई गई। योजना के तहत 1915 में वाराणसी में धमाका हुआ। इसकी गूंजें ब्रिटिश सरकार के कानों तक पहुंची।
1914 में क्रांतिकारियों की संस्था मातृवेदी से जुड़कर युवा इस कदर आजादी के दीवाने हुए कि अपना घर द्वार छोड़कर क्रांतिकारियों के साथ शामिल हो गए। मैनपुरी में बनी मातृवेदी संस्था से लखनऊ, आगरा, मथुरा, इटावा, फर्रुखाबाद, कानपुर, फतेहपुर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर तक के क्रांतिकारी जुड़ गए। योजना में शामिल होने वाले युवाओं ने शपथपत्र भी संस्था प्रमुख को दिए थे। खुलासा होने पर संस्था में शामिल माधोराम, गोविंद सिंह, रामप्रसाद, रामनरायन, मंगल सिंह को जेल तक काटनी पड़ी।
‘एक साल तक पिता को जेल में रखा गया’
स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय बिहारी लाल कश्यप के पुत्र मुन्नालाल कश्यप बताते हैं कि ब्रिटीश सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मैनपुरी में बनाई गई योजना के एक साल बाद वाराणसी में क्रांतिकारियों ने विस्फोट किया। इस योजना में उनके पिता भी शामिल थे। उनको एक साल तक जेल में यातनाएं भुगतनी पड़ीं।
‘शहीदों की याद में बनाए जाएं भव्य स्मारक’
साहित्यकार शिवजी श्रीवास्तव कहते हैं युवा पीढ़ी आजादी के आंदोलन में जिले के क्रांतिकारियों के योगदान को भूलती जा रही है। युवाओं को क्रांतिकारियों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। आजादी के दीवानों के इतिहास की जानकारी युवाओ को दी जानी चाहिए। इसके साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों की याद में जिले में कोई भव्य स्मारक बनना चाहिए।