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Agra News: शर्तों की उड़ी धज्जियां फिर भी मेहरबान रहे नगरायुक्त

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आगरा। नजूल भूमि पर खड़े राजा मंडी स्थित लाभचंद्र मार्केट पर अफसर मेहरबान रहे। पट्टे की शर्तों की धज्जियां उड़ती रहीं, दो बार पट्टा निरस्त होने की नाैबत तक आई, लेकिन तीसरी बार में खेल बदल गया। तत्कालीन नगरायुक्त आनंद वर्धन ने पट्टे का नवीनीकरण कर दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता ने तत्कालीन नगरायुक्त की भूमिका को संदिग्ध बताया है।
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लाभचंद्र मार्केट की भूमि विवादों में घिरती जा रही है। अब तक हुई जांच में सामने आया है कि जिस नजूल की भूमि का मालिकाना हक कलक्टर के पास था, उसका पट्टा नगर निगम ने कर दिया। दूसरा, जिस नजूल भूमि में सड़क या रास्ता शामिल था उस जिला प्रशासन ने फ्री होल्ड कर दिया। इन दोनों ही कमियों के मौजूदा समय में नगरायुक्त से लेकर जिलाधिकारी तक के पास जवाब न हों, लेकिन जिन शर्तों के उल्लंघन पर अप्रैल 2025 में पट्टा निरस्त किया गया, उनका खुलासा 2009 में हो चुका था।
तब शाॅप कीपर्स एसोसिएशन की शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी मृत्युंजय नारायण ने टीम से जांच कराई थी। इस जांच में उल्लंघन के आरोप सही मिले। इसके बाद तत्कालीन नगरायुक्त आनंद वर्धन ने 24 फरवरी 2009 में पट्टा निरस्तीकरण का नोटिस दिया। फिर 4 जुलाई 2009 को पट्टा निरस्त कर दिया जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। नगर निगम की लचर पैरवी के बीच 6 अप्रैल 2010 को पट्टा नवीनीकरण हो गया।
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नवीनीकरण में लगे थे भ्रष्टाचार के आरोप

पट्टा आवंटन और नवीनीकरण में नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। मुख्यमंत्री के आदेश पर विजिलेंस ने प्राथमिकी दर्ज की लेकिन, नतीजा ढाक के तीन पात रहा। 2022 में तत्कालीन गृह सचिव अवनीश अवस्थी ने विजिलेंस जांच पर आख्या मांगी। आरोप है रसूख के आगे आज तक जांच पूरी नहीं हो सकी।

डीएम पर लटकी अवमानना की तलवार
पट्टा निरस्त होने के बाद भी शिकमी किराएदारों से वसूली को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में सड़क की हकीकत सामने आई। तीन फरवरी 2026 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिन में डीएम को संयुक्त टीम बनाकर सड़क की पैमाइश कराने और अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई समय सीमा खत्म हो गई लेकिन, प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। ऐसे में अब डीएम पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की तलवार लटकी है।


हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ नवीनीकरण

पट्टाधारक विनय चंद्र जैन के पुत्र प्रदीप जैन का कहना है कि पट्टा नवीनीकरण व आवंटन में किसी तरह का अनियमितता नहीं बरती गई। पट्टे की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ। पट्टा कभी निरस्त नहीं हुआ। रोका गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने पट्टा 2010 में नवीनीकरण किया। पट्टे की जमीन के लिए उस समय बाजार मूल्य से डेढ़ गुना ज्यादा मूल्य अदा किया था। यह पट्टा मंडलायुक्त की विधिवत स्वीकृति एवं अनुमोदन से नगर पालिका ने दिया था जिसके संबंध में मंडलायुक्त एवं नगर पालिका प्रशासक के बीच विस्तृत पत्राचार भी हुआ था।



कोट…
पैमाइश और जांच लगभग पूरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पैमाइश व जांच लगभग पूरी हो चुकी है। तकनीकी कारण और 1947 के दस्तावेज व रिकाॅर्ड खंगालने में समय लगा। इस वजह से तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हो सकी। जल्द प्रशासन अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा। - अरविंद एम बंगारी, जिलाधिकारी
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