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कासगंज बवाल, अफवाहें रोकने के लिए पुलिस का ये कदम पड़ गया उल्टा

Tue, 30 Jan 2018 09:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला कासगंज
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कासगंज में तैनात पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज में हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने इंटरनेट सेवा बंद कराने का जो फैसला लिया, वह उल्टा पड़ गया। अफसरों ने सोचा था कि सोशल मीडिया बंद रहने से अफवाहें नहीं उड़ेंगी। 
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उन्हें शायद मालूम नहीं था कि अफवाहों को उड़ने के लिए इंटरनेट के पंखों की जरूरत नहीं होती है। उल्टा सोशल मीडिया बंद होने से अफवाहें और तेजी से फैलीं। इंटरनेट सर्विस चलती रहती तो अफवाहों का खंडन कर सही तस्वीर पेश की जा सकती थी। 

खुराफातियों ने आसपास के जिलों में सोशल मीडिया पर कई जगह की अफवाहें चलाई। झूठ भी परोसे। मुजफ्फरनगर दंगे की तस्वीरों को कासगंज की बताया गया। दो लोग गायब बताए गए। राहुल उपाध्याय नाम के युवक को हिंसा का शिकार बताया गया। 
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ये सारी अफवाहें घूम फिरकर कासगंज भी पहुंच रही थी। पुलिस के कानों तक पहुंची तो अफसर चौंके। तब तक देर हो चुकी थी। राहुल उपाध्याय को भी फोन पर पता चला कि उसकी मृत्यू की खबर सोशल मीडिया पर है। 

लोग उसका फोट लगाकर श्रद्धांजलि दे रहे थे। वह पुलिस के पास पहुंचा। आईजी ने बयान जारी किया कि वह जीवित है। राहुल का कहना है कि अगर सोशल मीडिया चालू होता तो वह इसी पर खण्डन कर देता। इसी तरह और भी अफवाहें चलीं। 

पुलिस इनका खंडन कर सकती थी लेकिन नहीं कर पाई। इसे देखते हुए पुलिस ने मंगलवार को इंटरनेट सेवा बहाल करा दी। उधर, इंटरनेट बंद होने से और भी परेशानियां हुई। एटीएम शोपीस बने रहे। बैंकों का कामकाज भी प्रभावित हुआ।
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