कासगंज में हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने इंटरनेट सेवा बंद कराने का जो फैसला लिया, वह उल्टा पड़ गया। अफसरों ने सोचा था कि सोशल मीडिया बंद रहने से अफवाहें नहीं उड़ेंगी।
उन्हें शायद मालूम नहीं था कि अफवाहों को उड़ने के लिए इंटरनेट के पंखों की जरूरत नहीं होती है। उल्टा सोशल मीडिया बंद होने से अफवाहें और तेजी से फैलीं। इंटरनेट सर्विस चलती रहती तो अफवाहों का खंडन कर सही तस्वीर पेश की जा सकती थी।
खुराफातियों ने आसपास के जिलों में सोशल मीडिया पर कई जगह की अफवाहें चलाई। झूठ भी परोसे। मुजफ्फरनगर दंगे की तस्वीरों को कासगंज की बताया गया। दो लोग गायब बताए गए। राहुल उपाध्याय नाम के युवक को हिंसा का शिकार बताया गया।