धूप की तपिश और भीषण गर्मी से बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक बेहाल हैं। जनपद के अधिकतर परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए ठंडा पानी तो छोड़िए मीठे पानी तक का इंतजाम नहीं है। दूूसरी तरफ शिक्षा विभाग के अधिकारियाें के कार्यालय में ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर लगे हैं या फिर मिनरल वाटर आता है।
गर्मी का प्रकोप बढ़ते ही प्रशासन ने सभी प्राइवेट, कॉन्वेंट और परिषदीय विद्यालयों के समय में बदलाव कर दिया। ऐसे में अब सभी विद्यालय सुबह 7 बजे से 12 बजे तक संचालित होंगे। प्राइवेट और कॉन्वेंट विद्यालयों में तो बच्चों के लिए वाटर कूलर के ठंडे पानी के इंतजाम है लेकिन परिषदीय विद्यालयों में बच्चे इससे वंचित हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गोंड ने बताया कि सभी विद्यालयों में पीने के पानी के इंतजाम हैं। सबमर्सिबल और हैंडपंप लगे हुए हैं। इसके अलावा पानी की टंकी भी लगाई गई हैं। अगर फिर भी पानी की समस्या हो रही है तो उसका समाधान किया जाएगा।
ये भी पढ़ें - UP: शादीशुदा महिला ने प्रेमी को ऐसी जगह छुपाया, किसी को शक न हो...संदूक के खुलते ही खुल गई पोल; फिर ये हुआ
सीन 1- प्राथमिक विद्यालय कन्या (कंपोजिट), वजीरपुरा
नगर निगम कार्यालय के बिल्कुल पीछे वजीरपुरा के कंपोजिट और प्राथमिक विद्यालय कन्या में करीब 80 बच्चे पढ़ते हैं। यहां पीने के लिए सबमर्सिबल लगा है लेकिन उससे खारा पानी निकलता है। इसमें से एक बाल्टी पानी भरकर बच्चों के पीने के लिए रखा है। गर्मी ज्यादा होने की वजह से पानी थोड़ी देर बाद गर्म हो जाता है। वहीं खारा पानी होने के कारण या तो बच्चे उसी से प्यास बुझाते हैं या घर से पानी की बोतल लेकर आते हैं।
ये भी पढ़ें - UP: एक घंटे में हुई शादी...दुल्हन के परिवार पर टूटी ऐसी आफत, दो लाशें और कई घायल; रोते-रोते पड़े सात फेरे
सीन 2- पूर्व माध्यमिक विद्यालय कन्या, ईदगाह
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कन्या, ईदगाह में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। विद्यालय में करीब 42 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय में सबमर्सिबल है लेकिन उसमें खारा पानी निकलता है। इंचार्ज प्राध्यापिका निधि ने बताया कि बच्चे खारा पानी नहीं पी पाते इसके लिए बाहर से पानी की बोतल मंगाते हैं। इसके लिए पैसे अपने पास से देने पड़ते हैं। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
यह उदाहरण जनपद के दो विद्यालयों का है। बल्कि कई अन्य विद्यालयों का भी ऐसा ही हाल है। जनपद में 2491 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें करीब 2.47 लाख छात्र-छात्राओं का नामांकन है, लेकिन कई विद्यालयों में बच्चों के लिए पीने के पानी का उचित इंतजाम नहीं हैं।