ताजमहल के फेसियल यानी मडपैक ट्रीटमेंट में चारों मीनारों और आर्च की सफाई के बाद मुख्य गुंबद की बारी आएगी। 365 साल पहले बने ताजमहल के मुख्य गुंबद पर पहली बार मडपैक के जरिए संगमरमर की सफाई की जाएगी, लेकिन इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मुख्य गुंबद के भार सहने की क्षमता की जांच कराएगा। लोहे या बांस-बल्ली की पाड़ का वजन झेलने लायक ताज की छत है भी या नहीं, सबसे पहले इसकी जांच कराई जाएगी।
1941 में विश्व युद्ध के समय मुख्य गुंबद को बांस-बल्लियों से ढका गया था। उसी समय गुंबद का संरक्षण कार्य कराया गया था। तब से अब तक मौसम की मार से इमारत की मजबूती पर भी असर पड़ा है। प्रदूषण से पीले पड़ चुके ताजमहल के गुंबद की मडपैक से सफाई से पहले ताज की छत की भार वहन क्षमता की जांच की जानी है।
एएसआई इसके लिए सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट या आईआईटी रुड़की से जांच कराने की तैयारी कर रही है। दरअसल, पूरे गुंबद पर एक साथ पाड़ बांधी जाएगी। मीनारों पर पाड़ बांधने पर पूरा भार चमेली फर्श पर था, लेकिन ताज की 365 साल पुरानी छत पर विभागीय अधिकारी कोई खतरा लेना नहीं चाहते। एएसआई अधिकारियों में लकड़ी की बल्लियों और बांस को भी विकल्प के तौर पर प्रयोग करने पर विचार चल रहा है।
एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम ने बताया कि गुंबद का मडपैक ट्रीटमेंट करने से पहले भार वहन क्षमता का निर्धारण कराया जाएगा। उसके बाद ही तय होगा कि गुंबद पर किस तरह की पाड़ बांधी जाएगी।