चिकन पॉक्स से पीड़ित आगरा कालेज की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा विमलेश आगे की परीक्षाएं देने पर अड़ी है। गुरुवार को परीक्षा देने के लिए आगरा कालेज पहुंचेगी। सीएचसी से मेडिकल भी कराया है। वहीं आगरा कालेज प्रशासन का कहना है कि सीएमओ की रिपोर्ट देखी जाएगी। उसी आधार पर परीक्षा में शामिल कराने का निर्णय लिया जाएगा।
छात्रा को आगरा कालेज में सोमवार को अंग्रेजी की परीक्षा बैठने से रोका गया था। कक्ष निरीक्षकों ने छात्रा से सीएमओ से फिटनेस रिपोर्ट लाने के लिए कहा था। मंगलवार को छात्रा कस्बे में स्थित सीएचसी पर गई थी, डाक्टरों ने पर्चा बनाकर उसे टकरा दिया था। बुधवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होेने के बाद सीएचसी के डाक्टरों ने छात्रा को मेडिकल रिपोर्ट दी।
विमलेश के चाचा विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि कालेज और स्वास्थ्य विभाग का व्यवहार ठीक नहीं रहा। विमलेश को परीक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। समाजसेवी राजेंद्र शर्मा का कहना है कि चिकन पॉक्स के चलते किसी के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, सीएचसी अधीक्षक डा. अजय विक्रम सिंह का कहना है कि चिकन पॉक्स से पीड़ित छात्रा को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता है। उसे अलग कक्ष अथवा दूसरे छात्रों से तीन चार फुट की दूरी पर बैठाकर परीक्षा दिलाई जा सकती है।
आज परीक्षा देने पहुंचेगी छात्रा
विमलेश गुरुवार को होने वाली अंग्रेजी तृतीय प्रश्न पत्र की परीक्षा देने आगरा कालेज पहुंचेगी। उसने बताया कि सीएचसी से रिपोर्ट मिलने के बाद उम्मीद है कि उसे परीक्षा में शामिल किया जाएगा। विमलेश ग्राम नगला देविया की रहने वाली है। वह महेश शर्मा की बेटी है और सात संतानों में सबसे बड़ी है। दो वर्ष पूर्व उसकी शादी कठूमरी जगनेर में हो चुकी है। वह परीक्षा देने के लिए इन दिनों अपने मायके में आई हुई है। वह ग्रेजुएशन के बाद आगे और पढ़ाई करना चाहती है।
‘विश्वविद्यालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि संक्रामक रोग के मरीज को परीक्षा में शामिल न कराया जाएगा। उसी का अनुपालन किया गया। पहले दिन छात्रा कोई सर्टिफिकेट नहीं लाई थी। वह सीएमओ की ओर से जारी फिटनेस सर्टिफिकेट देती है तो ही परीक्षा में शामिल कराया जाएगा।’ - डा. एके गुप्ता, प्राचार्य, आगरा कालेज
ये है विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देश
परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय की ओर से कक्ष निरीक्षकों को जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि ‘आपको देखना है कि ऐसा परीक्षार्थी जो वास्तव में किसी संक्रामक रोग ग्रस्त है अथवा जो पुन: स्वास्थोन्मुख होने के बाद संक्रमण से छुटकारा न पाया हो, को परीक्षा में सम्मलित होने की अनुमति प्रदान न की जाए। यदि कोई ऐसा परीक्षार्थी परीक्षा देता पाया जाए तो तुरंत उसके कागजात विनिष्ट कर दिए जाएं और असंक्रामक साधनाें का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। विश्वविद्यालय को इस संबंध में सूचित किया जाए।’