श्रीराम को न मानने वालों का राजनीतिक सफर खत्म
स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि मुझे खुशी है कि युवा वर्ग भगवान श्रीराम की वास्तविकता को समझ रहा है। श्रीराम का भी अस्तिव है, लेकिन विदेशों में रोजाना श्रीरामचरित्रमानस का पाठ होता है, वहां श्रीराम जी पूजनीय हैं। जिन लोगों ने राम को मानने से मना कर दिया था। ऐसे लोगों का राजनीति सफर भी खत्म होने वाला है।
संतों के संग से बन जाती है बिगड़ी
महिला का युवावस्था में सम्मान होता है, पर विद्वान का वृद्धावस्था में सम्मान होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, तो भोजन से भजन में मन लगता है। संत होना जीव का सबसे बड़ा सौभाग्य है। भगवान का नाम लेने में मन लग जाए, लीला में मन लग जाए, यही भजन है। संतों के संग लग जाने से व्यक्ति की बिगड़ी बन जाती है, संतों को देखने से भगवान याद आ जाते हैं।
इंदौर से पहुंचे युवा हास्य कवि
इंदौर से पहुंचे युवा हास्य कवि चेतन चर्चित ने कहा कि बना लो आप दास निज चरणों का हमको भी कृपा श्रीराम जी की मिल जाए....काव्य पाठ अकसर गुरु जी को मिलता था तब सुनाता था। पहली बार मंच पर आकर काव्य पाठ करने के लिए स्वामी रामभद्राचार्य जी ने खुद बुलाया। मानो मेरा जीवन धन्य हो गया। पहली बार मंच से काव्य पाठ किया।
गैलाना से रामकथा सुनने पहुंचे बृजेंद्र ने कहा कि हम लोग गुरु रामभद्राचार्य को सुनने के लिए गैलाना से आए हैं। अक्सर हम इन्हें सोशल मीडिया पर देखते सुनते थे। पहली बार गुरुजी के दर्शन हुए। बहुत दिन से श्रीराम कथा का हम लोग इंतजार कर रहे थे।