इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा को एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ से इस मामले की जांच दी गई थी। मोहम्मद जैद पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2003 में बनवाए शस्त्र लाइसेंस के शपथपत्र में अपनी उम्र 1975 दर्शायी, जबकि अन्य प्रमाणपत्रों में उनकी उम्र 1972 है। नेशनल शूटर अरशद खान के पास 5 लाइसेंस हैं। उन पर आरोप है कि प्रपत्रों में कम उम्र दिखाकर खुद को निशानेबाज दर्शाया, जिससे लाइसेंस बनने में कोई बाधा नहीं आए। साथ ही सभी शस्त्रों की खरीद से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए।
राजेश कुमार बघेल के पास लाइसेंस से संबंधित मूल पत्रावली नहीं मिली। लाइसेंस गुम होने की सूचना देकर गुमशुदगी के आधार पर असलहा लिपिक की सांठगांठ से शस्त्र क्रय कर रजिस्टर में चढ़वाया गया। शस्त्र लाइसेंस बनवाने और गुम होने की जांच के दौरान शस्त्र खरीदार शोभित चतुर्वेदी का नाम प्रकाश में आया। शोभित चतुर्वेदी पर एक और आरोप है कि उन्होंने फर्जी शपथपत्र लगाया। उनके पास टिहरी उत्तराखंड से जारी एक लाइसेंस पहले से मौजूद था। दूसरे लाइसेंस बनवाने के दौरान छिपाई।
ये भी पढ़ें - Mainpuri Accident: ट्रक ने रौंदा बाइक सवार युवक, एक की मौके पर मौत; दो की हालत गंभीर
लखनऊ का जन्मस्थान होने के बाद भी आगरा का मूल निवासी दर्शाया। शोभित चतुर्वेदी ने बरैठा की पिस्टल शिव कुमार सारस्वत से बिना किसी प्रपत्र के खरीदी। जांच के दौरान दस्तावेज नहीं दिखाए। भूपेंद्र सारस्वत पर आरोप है कि वह 21 साल के नहीं थे, इसके बावजूद शस्त्र लाइसेंस था। लाइसेंस वर्ष 2016-2017 में गुम होना बताया। आरोपी ने थाने में दर्ज गुमशुदगी के कागज नहीं दिए। पहले लाइसेंस की छायाप्रति तक उपलब्ध नहीं कराई। पूरी जांच में असलहा लिपिक संजय कपूर को भी आरोपी पाया गया। वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। उन पर कूटरचना, तथ्यों को छिपाना, असत्य शपथपत्र प्रेषित करने का आरोप है।
ये भी पढ़ें - UP: डिजिटल अरेस्ट में क्या होता है, युवती ने 31 दिन क्या कुछ नहीं झेला, जान लें...ऐसे गवां दिए 16.20 लाख रुपये