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STF का खुलासा: नेशनल शूटर, मीडियाकर्मी, असलहा बाबू...फर्जी शस्त्र लाइसेंस से हथियारों की खरीद का भंडाफोड़

Tue, 27 May 2025 09:12 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

फर्जी शस्त्र लाइसेंस से असलहा और कारतूस की खरीद-फरोख्त मामले में एसटीएफ ने जांच की तो नेशनल शूटर, मीडियाकर्मी, असलहा बाबू भी शामिल पाए गए।
 
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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 एसटीएफ ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस से असलहा और कारतूस की खरीद-फरोख्त का भंडाफोड़ किया है। गिरोह में राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज, एक मीडियाकर्मी व सेवानिवृत्त असलहा लिपिक भी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट एसटीएफ मुख्यालय भेजी गई थी। डीजीपी के आदेश पर थाना नाई की मंडी में 7 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज लगाने और आयुध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
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सिकंदरा के एक युवक ने मुख्यमंत्री पोर्टल और जनसुनवाई पोर्टल पर फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाने की शिकायत की थी। करीब एक साल तक इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद जांच एसटीएफ मुख्यालय से आगरा के एसटीएफ एसएसपी को भेजी गई। एफआईआर में मोहम्मद जैद, नेशनल शूटर मोहम्मद अरशद, राजेश कुमार बघेल, भूपेंद्र सारस्वत, मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त असलहा लिपिक संजय कपूर नामजद हैं।

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इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा को एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ से इस मामले की जांच दी गई थी। मोहम्मद जैद पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2003 में बनवाए शस्त्र लाइसेंस के शपथपत्र में अपनी उम्र 1975 दर्शायी, जबकि अन्य प्रमाणपत्रों में उनकी उम्र 1972 है। नेशनल शूटर अरशद खान के पास 5 लाइसेंस हैं। उन पर आरोप है कि प्रपत्रों में कम उम्र दिखाकर खुद को निशानेबाज दर्शाया, जिससे लाइसेंस बनने में कोई बाधा नहीं आए। साथ ही सभी शस्त्रों की खरीद से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए।

 

राजेश कुमार बघेल के पास लाइसेंस से संबंधित मूल पत्रावली नहीं मिली। लाइसेंस गुम होने की सूचना देकर गुमशुदगी के आधार पर असलहा लिपिक की सांठगांठ से शस्त्र क्रय कर रजिस्टर में चढ़वाया गया। शस्त्र लाइसेंस बनवाने और गुम होने की जांच के दौरान शस्त्र खरीदार शोभित चतुर्वेदी का नाम प्रकाश में आया। शोभित चतुर्वेदी पर एक और आरोप है कि उन्होंने फर्जी शपथपत्र लगाया। उनके पास टिहरी उत्तराखंड से जारी एक लाइसेंस पहले से मौजूद था। दूसरे लाइसेंस बनवाने के दौरान छिपाई।

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लखनऊ का जन्मस्थान होने के बाद भी आगरा का मूल निवासी दर्शाया। शोभित चतुर्वेदी ने बरैठा की पिस्टल शिव कुमार सारस्वत से बिना किसी प्रपत्र के खरीदी। जांच के दौरान दस्तावेज नहीं दिखाए। भूपेंद्र सारस्वत पर आरोप है कि वह 21 साल के नहीं थे, इसके बावजूद शस्त्र लाइसेंस था। लाइसेंस वर्ष 2016-2017 में गुम होना बताया। आरोपी ने थाने में दर्ज गुमशुदगी के कागज नहीं दिए। पहले लाइसेंस की छायाप्रति तक उपलब्ध नहीं कराई। पूरी जांच में असलहा लिपिक संजय कपूर को भी आरोपी पाया गया। वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। उन पर कूटरचना, तथ्यों को छिपाना, असत्य शपथपत्र प्रेषित करने का आरोप है।

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जमीन पर कब्जों की भी शिकायत
शिकायतकर्ता ने राजेश बघेल के विरुद्ध जमीन पर कब्जे कराने और कलेक्ट्रेट व तहसील में सांठगांठ करके फर्जी कागजात तैयार कराने के आरोप भी लगाए थे। उनके पास फर्जी लाइसेंस के हथियार होने की शिकायत भी की थी। एडीएम स्तर की जांच में भी विभाग ने भूपेंद्र और राजेश बघेल के लाइसेंस की पत्रावलियां नहीं होने की बाबत अपनी जांच आख्या दी थी।

 
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शिकायत होने पर बेच दिए असलहा
इस प्रकरण की शिकायत लखनऊ तक पहुंचने के बाद आरोपियों ने अपने असलहा दूसरे लोगों को बेच दिए। जांच में सामने आया कि आरोपी राजेश बघेल ने अपने असलहा अलीगढ़ में बेच दिए। इसके बाद डुप्लीकेट लाइसेंस सरेंडर कर दिए। यह लोग थाने में गुमशुदगी लिखाकर डुप्लीकेट लाइसेंस बनवाते थे। थाने की जीडी में भी एंट्री नहीं मिली। जैद खान ने भी अपना आपराधिक इतिहास छिपाया।
 
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