शुक्रवार को ग्राम नगला ढकन निवासी राजाराम के घर शाम का खाना बन रहा था, तभी किसी तरह से चूल्हे से निकली चिंगारी छप्पर से जा लगी। राजाराम के परिवार के लोग कुछ समझ पाते देखते ही देखते छप्पर धू-धू कर जलने लगा। आग ने ऐसा विकराल रूप धारण कर लिया कि पड़ोस के भूरे व विनोद की झोपड़ियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। तीनों की झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी। ग्रामीणों की चीख-पुकार और आग की ऊंची-ऊंची लपटों को देखकर ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीण आनन-फानन आग को बुझाने का प्रयास करने लगे। झोपड़ी में बंधी भैसें भी शोर मचाने लगीं। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर भैसों को जलती झोपड़ी से बाहर निकाला।
आग का विकराल रूप देखकर ग्रामीणों के हाथपांव फूल गए। ग्रामीणों ने घरों में लगे नलों व खेतों में लगे पंप सेटों से पानी भर कर आग पर डालने लगे और फायरसर्विस की गाड़ी को भी सूचित कर दिया। कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझ गई। तब तक झोपड़ियों में रखा सामान व नगदी जलकर राख हो गई। राजाराम ने बताया कि उसकी झोपड़ी में रखा गल्ला, बक्सा, कपड़े, बिस्तर, चारपाई सहित नगद 30 हजार रुपये जलकर राख हो गए।
भूरे ने बताया कि उसकी झोपड़ी में रखा गृहस्थी का सामान, गल्ला, बिस्तर, कपड़े सहित 15 हजार की नगदी जलकर राख हो गई। विनोद ने बताया कि गृहस्थी का सामान सहित 20 हजार की नगदी जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने अग्निकांड की सूचना उपजिलाधिकारी कुलदीप सिंह को दी। उपजिलाधिकारी ने क्षेत्रीय लेखपाल पंकज सक्सेना व दीपेंद्र कुमार को मौके पर भेजकर क्षेत्र का आकलन कराया। उपजिलाधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा कि अग्नि पीड़ित परिवार की नियम अनुसार हर संभव मदद की जाएगी।