एक महीने से जारी सियासी घमासान
राणा सांगा पर टिप्पणी के बाद मचा सियासी घमासान पिछले एक महीने से जारी है। 21 मार्च को राज्यसभा में दिए बयान के बाद रामजीलाल सुमन पर दो बार हमला हो चुका है। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ महापुरुषों के अपमान पर सपा पर निशाना साध रहे हैं। पलटवार करते हुए अखिलेश यादव इसे सरकार की सोची-समझी साजिश बता रहे हैं। ऐसे में सूबे से केंद्र तक सियासत गर्म है।
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कानून व्यवस्था के लिए बताया खतरा
करणी सेना के ओकेंद्र राणा ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए सपा को सफा करने का एलान किया है। उधर, अनूसूचित वर्ग व अन्य संगठनों ने हमले की निंदा करते हुए कानून व्यवस्था के लिए खतरा बताया है। ऐसे में सपा मिशन 2027 के लिए इस मुद्दे को भुनाना चाहती है। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों के बीच पकड़ मजबूत करने में लगी है।
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तेज हो सकता है सियासी संघर्ष
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पहले हमले के बाद आगरा को सामाजिक न्याय का राज स्थापित करने के लिए प्रतीकात्मक राजधानी माना था। ऐसे में अब सियासी संघर्ष तेज हो सकता है।
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हमला हुआ या प्रायोजित, जांच का विषय
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि हिंसा का समर्थन कहीं भी उचित नहीं है। लेकिन यह जांच का विषय है कि यह हमला वास्तव में हुआ है या प्रायोजित था, क्योंकि काफिले में तमाम कार्यकर्ता उनके साथ थे। अगर वाकई हमला हुआ है तो यह निंदा योग्य है और संबंधित जिले की पुलिस इसकी जांच करके कार्रवाई करेगी।