बीएससी पास है सॉल्वर विकास
पुलिस की पूछताछ में विकास ने बताया कि वह बीएससी पास है। पढ़ने में अच्छा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कर रहा है। अजय उसका दोस्त है। उसने ही विकास को रुपयों का लालच दिया। तब वो सॉल्वर बनकर परीक्षा में बैठा था। अजय ने परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा देने पर एक लाख रुपये देने का वादा किया था।
दस हजार हजार रुपये परीक्षा के बाद, बाकी रकम परीक्षा पास करने पर थी। वह लालच में आ गया। हरिओम के आधारकार्ड पर उसका फोटो लगाया। ई-एडमिटकार्ड के फोटो को धुंधलाकर प्रिंट निकाल लिया। उनके अंगूठा के फर्जी फिंगर प्रिंट बनाकर विकास को दिए थे, जिससे वह पेपर देते समय पकड़ा न जा सके। वह परीक्षा देने में सफल हो गया।
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अजय के भाई राममोहन के स्थान पर भी परीक्षा देने के लिए कुनाल प्रोफेशनल एजूकेशन एकेडमी की द्वितीय पाली की परीक्षा में बैठना था। मगर, पुलिस ने पकड़ लिया। अजय कोचिंग में तैयारी करने वाले ऐसे छात्रों की तलाश में रहता है, जोकि पढ़ाई में कमजोर होते हैं। परीक्षा में पास कराने का आश्वासन देता है। 1 से 2 लाख रुपये लेता है। उसने हरिओम के 5 फर्जी फिंगर प्रिंट तैयार किये थे। यह विकास को दिए थे।
सेल्यूलॉइड टेप और ग्लू स्टिक से बना रहे अंगूठे का फिंगर प्रिंटपुलिस की मानें तो बायोमेट्रिक से बचने के लिए सॉल्वर गैंग 2 तरीके से नकली फिंगर प्रिंट तैयार कर रहे हैं। जनवरी में एक गैंग पकड़ा था, जोकि पोटाश, ग्लू स्टिक, फेवीकोल, ज्योमेट्री बॉक्स से फिंगर प्रिंट तैयार करता था। ग्लू को पिघलाकर, फेवीकोल और पोटाश मिलाकर, रंग व इत्र डालकर अंगूठे का निशान तैयार करता था।
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दूसरा तरीका सेल्यूलॉयड टेप से फिंगर प्रिंट तैयार करने का है। थाना ताजगंज के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र शंकर पांडेय ने बताया कि सेल्यूलॉइड टेप काफी पतला होता है। इस पर आरोपी अभ्यर्थी का फिंगर प्रिंट लेते थे। दूसरी तरफ से सॉल्वर अपने अंगूठे पर इसे चिपका लेता था, जिससे पकड़ा नहीं जाता था। बायोमेट्रिक भी हो जाता है।