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भजन गाकर भगवान महावीर को पालना में झुलाया

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आगरा। पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर रोशन मोहल्ला में भक्ति की बयार बही। श्रद्धालुओं ने भजन गाते हुए भगवान महावीर को पालना झुलाया। शाम को यहां से पालना जैन दादाबाड़ी पहुंचा।
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दोपहर में भगवान महावीर की माता त्रिशला द्वारा देखे गए 14 महास्वपनों के दर्शन कराते हुए इनका महत्व बताया। भगवान का जन्म होते ही खुशी में भक्त झूमने लगे। भगवान का प्रथम पालना का सौभाग्य अशोक कुमार ललवानी परिवार को मिला। शाम को दादाबाड़ी स्थित मूलनायक महावीर स्वामी जैन मंदिर में पालना आने पर भक्तों ने भजन गाए। जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक श्रीसंघ के अध्यक्ष राजकुमार जैन और आगरा विकास मंच के संयोजक सुनील जैन बताया कि इस पावन मौके पर दिवंगत अशोक जैन सीए के प्रकल्प के तहत 18 साल के युवक के हार्ट सर्जरी कराने के लिए गोद भी लिया है। कोरोना महामारी में बेहतर सेवाएं देने वालों को सम्मानित भी किया। मालचंद्र जैनल, महेंद्र जैन, सुशील जैन, विजय सेठिया, मानकचंद्र, पारस चपलावत, वीरू वोहरा, अशोक लोढ़ा, विमल जैन, निखिल जैन, प्रदीप लोढ़ा, अजय चौरड़िया, बिजेंद्र लोढ़ा, संजय दूगड़ रहे।
निर्मल सदन में मुनिश्री धवल सागर महाराज ने कहा कि संयम की राह पर चलने वाला ही रागी है। एक संयम बाहरी और एक अंदर होता है। बाहरी संयम व्रत करवाता है और भीतर का संयम बरतना कठिन है, इसके लिए विकृतियों को त्यागकर मन को तपाना होता है। यह करने पर ही असल में आनंद आएगा और जीवन में उत्साह का संचार होगा। मुनिश्री वीर सागर ने मुनिश्री धवल सागर महाराज को शास्त्र भेंट किए। पन्नालाल बैनाड़ा, वंदना जैन, हेमलता जैन, रति जैन, अंजना जैन, मधु जैन, रेनू जैन रहे।
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हरीपर्वत स्थित जैन मंदिर में मुनिश्री प्रणम्य सागर महाराज ने पार्श्वकथा के 34वें दिन समवषरण का वर्णन करते हुए कहा कि इसकी दस प्रकार की ध्वजाएं स्वर्ण के खंभों पर लहराती हुई हर आने वाले का स्वागत करती हैं। दस ध्वजाओं पर माला, वस्त्र, मयूर, कमल, हंस, गरुण,सिंह, वृषभ, हाथी और चक्र के निशान होते हैं। शिखर पर लगी मुख्य जिनध्वजा भी कपड़े की तरह लहराती होनी चाहिए। मंदिर पर सजा कलश मंगलकारी होता है, यह हमेशा जगमग होना चाहिए। आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, सुनील जैन, राजकुमार राजू, अनंत जैन, मनोज जैन, निर्मल मौठिया, संजय जैन, हरीलाल बैनाड़ा, निरंजन लाल बैनाड़ा, संजय जैन, मनीष जैन, शुभम जैन रहे।
अग्रसेन भवन में जैनाचार्य श्री ज्ञानचंद्र महाराज ने कहा कि सुख-शांति के लिए परिवार में कोई न कोई पुण्यवादी होना चाहिए। जब घर में कलह, परेशानियां बढ़ने लगे तो आमदनी में से पांच से दस फीसदी खर्च जन कल्याण के कार्यों में खर्च करने से पुण्य और शांति मिलती है। उन्होंने महिलाओं को धार्मिक होने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्नी लक्ष्मी होती है और उसे धार्मिक होना जरूरी है। इसी के चलते पति अपनी पत्नी को धर्मपत्नी कहते हुए संबोधित करता है। आज की प्रभावना दिल्ली से आए नीरज जैन के परिवार ने की। अनु जैन, तारिसी जैन, मानसी जैन, निमित जैन, अशोक सुराना रहे।
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