चांदी की मंडी कहे जाने वाले आगरा में सराफा कारोबार धड़ाम हो चुका है। सोमवार को चांदी एमसीएक्स पर तीन लाख प्रति किलो पहुंच गई। ऑल टाइम हाई चल रही चांदी में आई तेजी से कारोबारी परेशान हैं। शहर में 2500 से अधिक सराफा कारोबारी हैं। हर माह करीब 50 टन चांदी का कारोबार होता है। एक लाख से अधिक कारीगर जुड़े हुए हैं। कुटीर उद्योग की तरह घर-घर पायल बनाई जाती हैं। लेकिन, चांदी की चमक से बाजार में सन्नाटा पसरा है। सबसे बड़ा संकट पुराने माल का भुगतान रुक गया है। जिन कारोबारियों ने 20 या 30 किलो चांदी पायल बनाने के लिए कारीगरों को दी, वह भी उनसे वापस ली जा रही है। चांदी का अधिकांश कारोबार उधारी में होता था। तेजी के कारण माल नहीं बिक रहा। इस वजह से करोड़ों रुपये का भुगतान भी अधर में फंसा है।
आम आदमी पर बोझ
आगरा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने बताया कि चांदी कीमतों में वृद्धि से आम आदमी प्रभावित है। चांदी को गरीबों का सोना कहा जाता था। अब यह आम आदमी के बस से बाहर हो गई है। कारोबारियों को माल की चिंता सता रही है।