डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर के लिए होने वाले आंदोलन की कमान पंडित दीनदयाल उपाध्याय को सौंपी थी। इसका एलान 1952 में जनसंघ के कानपुर अधिवेशन में किया गया था। इसमें तय हुआ था कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए सत्याग्रह शुरू होगा। सत्याग्रह जबरदस्त तरीके से शुरू भी हुआ।
अब जब अनुच्छेद 370 खत्म हो गया है तो पंडित जी के गांव नगला चंद्रभान के लोगों का कहना है कि दीनदयाल का सपना पूरा हो गया। आज जब कश्मीर अनुच्छेद 370 से आजाद हो गया है तब पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान में हर कोई पंडित जी की संघर्ष गाथा को सुना रहा है।
इस गांव के पुराने लोग कहते हैं कि पंडित जी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में जनसंघ की स्थापना के बाद से ही कश्मीर समस्या का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया था। पहले दीनदयाल उपाध्याय का आफिस लखनऊ में हुआ करता था लेकिन कश्मीर आंदोलन को देखते हुए इसे दिल्ली में बना दिया गया था। कश्मीर को लेकर होने वाले आंदोलनों में पंडित जी की संघर्ष गाथा का उल्लेख पंडित जी के ऊपर लिखी गई किताब में भी है।