पुलिस ने थाने से दी थी जमानत
उप चिकित्सा अधिकारी की तहरीर पर थाना न्यू आगरा में श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन के खिलाफ धारा 188, 505, आपदा अधिनियम की धारा 52, 54 और महामारी अधिनियम की धारा-तीन के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। 19 जून को मामले में सात साल से कम सजा का प्रावधान होने पर डॉ. अरिन्जय जैन को थाने से जमानत दे दी गई। इसके बाद पुलिस ने पिछले दिनों कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। सीजेएम ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए आरोपी को मुकदमे के विचारण के लिए कोर्ट में तलब किया था। आरोपी डॉ. अरिन्जय जैन ने वरिष्ठ अधिवक्ता केके शर्मा और सुब्रत मेहरा के माध्यम से कोर्ट में कथन किया कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। उस पर मॉकड्रिल कर 22 लोगों की हत्या का आरोप आधारहीन है। मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट पेश की। आरोपी ने खुद को बीमार भी बताया। सीजेएम ने आरोपी के को 20-20 हजार के दो-दो जमानती और इसी राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहाई के आदेश किए।
डीवीआर और मोबाइल की रिपोर्ट भी नहीं ले पाई पुलिस
डॉ. अरिन्जय जैन के खिलाफ दर्ज केस में पुलिस ने शुरू से ही लापरवाही बरती। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को जब्त नहीं किया गया। इस संबंध में मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस हरकत में आई। डीवीआर को जब्त किया गया। कई दिन तक डीवीआर लखनऊ से लेकर आगरा लैब के बीच घूमती रही। बाद में डीवीआर को लखनऊ फॉरेंसिक लैब भेजा गया। इसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है। वहीं पुलिस ने एक युवक और सराफ का मोबाइल भी जब्त किया था। इन मोबाइल से ही वीडियो बनाने का शक था। वीडियो को फॉरेंसिक लैब भेजा गया। मगर, अब तक इन मोबाइल की रिपोर्ट नहीं आ सकी है।
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