मैनपुरी निवासी 26 वर्षीय सनोज कुमार को तेज बुखार, सांस की तकलीफ थी, लेकिन उसका भी बिना जांच के किए कोविड इलाज किया गया। दो दिन में युवक की मृत्यु हो गई। ये महज चंद उदाहरण है आंकड़ों की विडंबना के। जिनसे साबित हो रहा है कि संक्रमण की वास्तविक स्थिति छिपाने में भी श्री पारस प्रबंधन ने कसर नहीं छोड़ी।
पिछले साल भी छिपाई थी हकीकत
ताजनगरी में जब पहली बार संक्रमण ने दस्तक दी, तब श्री पारस अस्पताल ने संक्रमितों के बारे में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को नहीं बताया था। पिछले साल भी हकीकत छिपाई। 11 जिलों में मरीज मिले तब संक्रमण फैलाने पर अस्पताल सील किया किया था। छह महीने तक श्री पारस सील रहा। महामारी एक्ट का मुकदमा लंबित है।
सोशल मीडिया पर जारी है ‘न्यायनीति’
पिछले 15 दिनों से श्री पारस को लेकर पीड़ितों ने सोशल मीडिया पर न्यायनीति के नाम से मुहिम छेड़ रखी है। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल पूछे जा रहे हैं। 15 दिन में 25 हजार से अधिक लोग इस पेज का लाइक कर चुके हैं।