इसके बावजूद डॉक्टर और कर्मचारी ऑक्सीजन मंगाते रहे। वह ऑक्सीजन का इंतजाम करने लगे। 15 मिनट बाद में उन्हें बहनोई की मौत का प्रमाण पत्र दे दिया गया। आपत्ति करने पर गालियां देने लगे। 1.10 लाख रुपये की मांग की।
आरोप लगाया कि डॉ. अरिन्जय जैन और अन्य बहनोई रिंकू उर्फ रजनीश का इलाज कोरोना संक्रमित न होने के बावजूद भी कोविड में करते रहे। सात जून को डॉक्टर का एक वीडियो सामने आया। इसमें वह ऑक्सीजन की कमी और मॉक ड्रिल की बात कर रहे हैं। इस पर 24 मई को एसएसपी आफिस में प्रार्थना पत्र दिया। मगर, कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिवक्ताओं के पैनल ने तैयार किए कागजात
युवा अधिवक्ता संघ की एक बैठक गुरुवार को कार्यालय पर हुई। इसमें चार पीड़ितों के प्रार्थना पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए। मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने बताया कि उनके पैनल से 28 अधिवक्ता जुड़ चुके हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश वर्मा, सुनील कुमार शर्मा (संरक्षक), नरेंद्र शर्मा, संजय पचौरी आदि ने अपना समर्थन दिया। वहीं सुनील शर्मा, नरेंद्र शर्मा, योगेश लवानिया, अरुण तेहरिया, कृष्ण मुरारी माहेश्वरी आदि ने राजू सिंह यादव के प्रार्थना पत्र को ई फाइल किया।
धीमी जांच : दस दिन बाद भी नहीं मिली मोबाइल की रिपोर्ट
श्री पारस अस्पाल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन का वीडियो वायरल होने के बाद उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री ने थाना न्यू आगरा में आठ जून को मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन, महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा में आरोपी बनाया गया था।
पुलिस अस्पताल में वीडियो बनाने वाले की तलाश कर रही थी। पुलिस ने जीवनी मंडी क्षेत्र के एक युवक को पकड़ा था। उस पर वीडियो बनाने का शक था। मगर, युवक ने पूछताछ में इनकार किया था। इस पर उसका मोबाइल चेक किया। मोबाइल में वीडियो नहीं मिला। वीडियो को डिलीट करने की आशंका पर मोबाइल को फोरेंसिक लैब भेजा गया था। मगर, दस दिन बाद भी इसकी रिपोर्ट नहीं आ सकी है। थाना न्यू आगरा के प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह बालियान का कहना है कि रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
श्री पारस अस्पताल दमघोंटू मॉकड्रिल मामला: आगरा के युवा अधिवक्ताओं का पैनल लड़ेगा पीड़ितों की लड़ाई, अदालत में प्रार्थनापत्र