पुलिस की साख का लगा बट्टा, फिर भी अफसर मौन
आईजी नवीन अरोरा के संज्ञान में यह मामला नहीं आता तो फरह पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध वसूली का खेल बदस्तूर चलता रहता। कृष्णा अग्रवाल के अुनसार तीन सितंबर को भी उनके चावल से भरे ट्रक को छटीकरा चौराहे पर रोका गया था। पुलिस की मिलीभगत से यह कथित पत्रकार दो लाख रुपये की अवैध वसूली कर चुके हैं।
सात सितंबर को भी गोवर्धन चौराहे पर उनके ट्रक को रोककर दो लाख रुपये की मांग की थी। तब भी इन कथित पत्रकारों ने थाने में बंद कराने की धमकी दी थी। यह अवैध वसूली तो लगातार पुलिस की मिलीभगत से चल रही थी। खासकर थाना फरह पुलिस के इंस्पेक्टर और अफसरों को न पता होना भी सवाल खड़े करता है।
गल्ला व्यापारी ने तीन सितंबर को दो लाख रुपये की हुई वसूली के बाद इसकी शिकायत एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर से की थी। एसएसपी ने शिकायत मिलने पर इसकी जांच एसपी क्राइम को दी थी। जांच के दौरान भी बेखौफ होकर पुलिसकर्मी और कथित पत्रकार अवैध वसूली में लिप्त रहे। आरोपी जितेंद्र शर्मा उर्फ जीतू का आपराधिक इतिहास है। उस पर लूट, चोरी, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट आदि करीब आधा दर्जन मुकदमे कोतवाली में दर्ज हैं।